चमत्कार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** यदि एक बार तुम आ जातेपथ में पराग बिछाते हम,आलोकित होता जग साराऔर हर्षित होते सारे हम। यह चमत्कार यदि हो जाएअनुराग पुष्प अर्पित करती,याद किया करती हर दिनवह बीते दिन सुमिरन करती। यदि काश अगर आ जाते तुमदिखलाती दुनिया के मिज़ाज,कैसे-कैसे सब बदल गएपहले क्या और क्या है आज। सब मतलब … Read more

एक युग का अवसान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुर की ज्योति बुझी नहीं है, आसमां में आज भी छायी,तेरी मधुर तान अमर हो आशा, हर धड़कन में समायी। जग ने खोया स्वर का सागर, विश्व गूँजे शोक अपार,फिर भी तेरे गीत रहेंगे, जन यादों में बारम्बार। मधुरिम स्वर की रानी तुम थी, विविध रागों की परछाई,हर लय … Read more

जो मेरे प्रेम को समझा नहीं…

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जो मेरे प्रेम को नहीं समझा,मैं भी उससे प्रेम करना नहीं चाहती। कभी मुझे अपना समझो तो ठीक है,बंदिशों में रिश्ते निभाना नहीं चाहती। मेरी मंज़िल तो बस एक है,जिसको मैंने सपनों में देखा था कभी। खड़ी थी समंदर किनारे पर,नदियों ने अपना प्रेम जताया मुझे। भटकती रही शान्ति के लिए,हर जगह … Read more

आँखों में समंदर

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अपने आँखों के समंदर में डूब जाने दे मुझे,जो प्यार और दर्द की गहराई को व्यक्त करते हैंआँखों में समंदर भरा है, जो तेरी आँखों में दिखता है,मैं भी तेरी आँखों के समंदर में डूब जाने का इरादा रखती हूँ। क्या-क्या छिपा है इस समंदर की गहराई में,तेरे ख़यालों का, तेरी … Read more

जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है ‘मेरी डायरी’

मुकेश इन्दौरीइन्दौर (मध्यप्रदेश) ********************************************** ◾​प्रमुख मुद्दे:​🔹पारिवारिक और नैतिक मूल्य-लेखिका अपनी माँ को ‘प्रथम गुरु’ मानती हैं और उनसे मिले संस्कारों का उल्लेख करती हैं।🔹सामाजिक चिंताएँ-समाज में बढ़ती संवेदनहीनता, अपराध (जैसे बलात्कार) और लुप्त होते तीज-त्योहारों पर गहरा प्रहार किया गया है।🔹प्रकृति और मनोविज्ञान-इसमें पर्यावरण संरक्षण, ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और ‘ग्रोथ माइंडसेट’ … Read more

आस में देखूँ तुम्हारे इशारे

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* लौटने की आस में देखूँ तुम्हारे इशारे,जबसे तुम गए हो, मैंने दिन-रात रो-रो कर गुज़ारेरात बिताते गिन-गिन तारे। लौटने की आस में करूँ इंतज़ार तेरा,अब नहीं लौटकर आने वालेघर छोड़ कर जाने वाले,अब तुम सदा के लिए चले गएलेकिन मैं इंतज़ार करूँ सिर्फ तेरा। तुम्हारे फिर कभी रूप बदल कर आने … Read more

महायुद्ध का नाश हो

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* युद्ध और शांति: जरूरी क्या ?… कैसा तम बिखरा हुआ, डरता मन का मोर।सभी आज सहमे हुए, मचा हुआ है शोर॥ बतियाती ना अब हवा, पूछ रही ना हाल।चुप चुप रहते खग सभी, बदली उनकी चाल॥ सूरज भी तो जग उठा, सुन चिड़ियों का शोर।उसे आज मैं बांध दूं, … Read more

नारी वंदन है अभिनंदन है…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ बदलते भारत की है यह नई कहानी,यहाँ नारी शक्ति की आँखों में आँसू नहीं है,क्योंकि वह शाक्ति है, व साहस और विश्वास है,तभी तो नारी वंदन है, अभिनंदन है…। वह नहीं है किसी से कम, उनका नहीं हो अपमान,वह तो हर एक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैइसीलिए ‘मान-सम्मान’ दे … Read more

शिक्षित बनो, संगठित रहो

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती विशेष… शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो,था नारा भीमराव आम्बेडकर का, नेता दलितों के। भीवा, भीमा, बाबा साहब आम्बेडकर, भीमराव,बोधिसत्व नाम माता भीमाबाई, पिता रामजी राव। ये महार जाति के थे, बाद में बौद्ध धर्म अपनाया,जन्म चौदह अप्रैल १८९१ स्थान महू इंदौर आया। पत्नी रमाबाई और सविताबाई … Read more

आज रहने दो

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** आज रहने दो अपरिचितआज रहने दो अकेले,बरस ले यह घिरा घन भीआर्द्र चितवन के ये मेले। फूटते उर के मृदुल स्वरआज सुधि नर्तन की आई,घुँघरूँओं की खनक सुननानूपुरों के मन को भाई। आवास भू अंचल मिलाराह तुम पाथेय खोलो,वेदना-जल, स्वप्न-शतदलजुगनुओं आ करके बोलो। प्राण हँस कर कह रहा है,अमरता के बीज बोना।बुझे … Read more