ईमानदारी से बड़ी विरासत नहीं

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)************************************************* सतरंगी दुनिया-३०…. इस दुनिया में सिर्फ धोखा एवं धक्का ही मुफ्त में मिलता है, बाकी हर चीज की कीमत चुकानी पड़‌ती है। देखिए हमारे देश की हालत- कचरा उठाने वाला अनपढ़‌ है और कचरा फेंकने वाले पढ़े-लिखे। हर कोशिश में शायद सफलता नहीं मिल पाती है, लेकिन प्रत्येक सफलता … Read more

आशियाना बिखर गया

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अमेरिका की चमकती गलियों में सुरेश एक खुशहाल ज़िंदगी जी रहा था। वह विदेशी धरती पर नौकरी करता था, पर धड़कन हिंदुस्तान की मिट्टी के लिए धड़कती थी। उसकी दुनिया २ बेटों में बसती थी — ७ साल का आर्यन और ५ साल का अमन। पत्नी की हँसी ही उसके घर की … Read more

लेखकों का कर्म और धर्म दोनों महत्वपूर्ण

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* लेखकों का कर्म और धर्म दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज की विभिन्न समस्याओं को उजागर करना और उनके उचित समाधान प्रस्तुत करना लेखक का प्रमुख दायित्व होता है। लेखक का प्रथम कार्य सत्य का अन्वेषण करना तथा उसका निष्पक्ष रूप से प्रस्तुतिकरण करना है। उसे समाज में विद्यमान अच्छाइयों और … Read more

भरोसे के रिश्तों के कत्ल से कांपता समाज

ललित गर्गदिल्ली********************************** पुणे के लोहगढ़ किले की ऊँची पहाड़ी से मंगेतर केतन अग्रवाल को धक्का देकर हत्या करने के आरोप में सिया गोयल की गिरफ्तारी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इससे पहले मेघालय में इंदौर के राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर कथित तौर पर की गई हत्या … Read more

विनाश का प्रमुख कारण अहंकार

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** एक छोटे से गाँव में एक प्रतिभाशाली मूर्तिकार रहता था, जिसका नाम था रमेश। उसे मूर्तिकला से गहरा लगाव था, और उसने अपनी पूरी ज़िंदगी इस कला को समर्पित कर दी। सालों की मेहनत से उसकी कला इतनी निखर गई कि उसकी हर मूर्ति में जान-सी मालूम पड़ती थी। गाँव के … Read more

दातून करना भूल चुके हो…तो

राधा गोयलनई दिल्ली**************************************** “आए दिन तुम्हारे दाँतों में कुछ न कुछ समस्या होती ही रहती है। डॉक्टर के पास ही चक्कर लगते रहते हैं, लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। कोलगेट टूथपेस्ट छोड़ा तो डॉक्टर के कहने पर पैप्सोडेण्ट शुरू कर दिया।“   “तो आप ही बताओ ना कि क्या करें ? दाँत किस पेस्ट से साफ … Read more

पारंपरिक शिक्षा से बर्बाद होता  युवाओं का भविष्य

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत को युवा शक्ति का देश कहा जाता है और यह माना जाता है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में होता है, किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को बदलते समय की चुनौतियों के लिए तैयार किया … Read more

पुस्तकों को पकड़ कर रखो

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** अब्राहम लिंकन ने कहा था कि “पुस्तकें आदमी को यह बताने के काम में आती हैं कि उनके ये मूल विचार इतने भी नये नहीं हैं।”    यह सच भी है कि किताबों से गुजरना श्रेष्ठ अनुभवों से गुजरने जैसा है। किताबें पढ़ने से बड़ा सुख शायद ही कोई हो। इसी लिए पुस्तकों यानी … Read more

लेखक का कर्म ‘सृजन’ और धर्म ‘लोकमंगल’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, उसका मार्गदर्शक भी होता है। लेखक केवल शब्दों का शिल्पी नहीं, बल्कि युग-चेतना का संवाहक, संस्कृति का संरक्षक और मानवीय मूल्यों का प्रहरी होता है। इसलिए लेखकों का कर्म और धर्म सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण माना जाता है।लेखक का प्रथम कर्म … Read more

हर सफलता में उनका योगदान

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरी असली प्रेरणा मेरे पिता जी हैं। मैंने उन्हीं की छात्र-छाया में आज अपनी मंजिल पायी है। आप ही वो वटवृक्ष हो, जिसकी छाया में मन प्रफुल्लित होता है। सदा मन कहता है कि आपके मतानुसार चलती रहूँ। आप ही जीवन हो, आप ही शक्ति हो, आप ही ताकत हो, आप … Read more