आंतरिक शुचिता है उत्तम शौच धर्म
डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** ‘उत्तम शौच’ का अर्थ है पवित्रता। आचरण में नम्रता, विचारों में निर्मलता लाना ही शौच धर्म है। बाहर की पवित्रता का ध्यान तो हर कोई रखता है, लेकिन यहां आंतरिक पवित्रता की बात है। आंतरिक पवित्रता तभी घटित होती है, जब मनुष्य लोभ से मुक्त होता है। शौच धर्म कहता है कि आवश्यक्ता, … Read more