आओ,अमृत पान करें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ****************************************************** शरद पूर्णिमा विशेष…. ‘चंदा से झरता अमिय,देता जो उल्लास।किरणें सुख को बाँटती,जीने का अहसास॥’शरद पूर्णिमा,जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं;हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार-पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। शरद पूर्णिमा … Read more

ईश्वर संग हमारी आस्था,यही सत्यता

सतीश ‘बब्बा’चित्रकूट(उत्तरप्रदेश)************************************************* ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. ‘ई’ और ‘स्वर’ से बना यह ईश्वर शब्द, भारतीय जनमानस की आस्था का केंद्र है। बहुत पहले से ईश्वर और हमारी आस्था पर बहस,शोध होते रहे हैं।ईश्वर कहाँ है,ईश्वर क्या है,ईश्वर कैसा है ?,आज तक मात्र कल्पनाओं का पुलिंदा है,किसी ने ईश्वर को देखा नहीं है! ईश्वर … Read more

माँ तेरा आशीष ही मांगूं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ माँ तेरी हम सबको ज़रूरत है।जो मिला सब ही तेरी रहमत है। होशो-हवास होता कहाँ हमको,तू ही इस दुनिया की इबादत है। हम तन्हा जी सकते ही नहीं,माँ तुमसे ही हम सलामत है। अम्बे तू जगदम्बे तू,तू दुःख भंजनी,जो तुझे न माने उसे हिक़ारत है। माँ भारती हो या माँ दुर्गा हो,जीवन में … Read more

बजी ढोलकी बन बादन की

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ पथ से अधिक थकाने वाली,मंजिल मुझे मिली जीवन की।चरणों को विश्राम मिल गया,चाल रही ज्यों की त्यों मन की॥ अब जाऊँ किस ओर जगत के,ओर-छोर दोनों चल आईनहीं ओर में ठौर कहीं भी,नहीं छोर में,मैं रह पाई।चली ओर से थी समीर-सी,लौटी बन बदली सावन की…॥ जब तक रही ओर में भव के,थे सोपान … Read more

रोती है बिटिया

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* नौ दिन आई हैं माॅ॑ नवदुर्गा,सुख समृद्धि लाई हैं नवदुर्गामन खुशी से झूमता रहा,जब से आई हैं माता नवदुर्गा। पुत्रों को,माॅ॑ ने अजर-अमर किया,पुत्री का माॅ॑ ने सुहाग अमर कियाभरा खाली घर,भन्डार माता,बाॅ॑झन को माॅ॑ बना दी हैं माता। जगत में सभी खुश हुए दुखिया,निर्धन को माता बना दी सुखियाचमत्कारी है,हमारी … Read more

छलावा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** जिन्दगी में जिन्दगी के साथ रहना है जरुरी,सत्य राहों पर सतत निर्बाध बहना है जरूरी। राह में बाधाएं तो आती ही रहती है निरंतर,निकल आती हैं उन्हीं बाधाओं से ही राह अक्सर।मिल ही जाता अपना कोई राह में चलते हुए ही,गाँठ खुलकर दुश्मनी की मेल हो जाता परस्पर।अपने मन के भाव … Read more

मानसिकता

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** सासू माँ सुबह से हल्ला मचा रही थी,-सब जल्दी नहा लो। आज नवदुर्गे व्रत का समापन है। आज हवन करने के बाद कन्या लांगुरा को खाना खिलाते हैं। उसके बाद ही घर के सब सदस्य भोजन करते हैं।सब जल्दी जल्दी तैयार होकर हवन बेदी पर बैठ गए। हवन समाप्ति के बाद कन्या … Read more

ईश एक दिव्य अनुभूति

मधु मिश्रानुआपाड़ा(ओडिशा)******************************** ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. दृढ़ आस्था ही उपजाता…हममें अटल विश्वास…,हो प्रतिमा जैसी भी उसमें…लगता ईश्वर का वास…। होने लगती है धीरे-धीरे…कोई दिव्य अनुभूति…,हर्ष रहे या व्यथा पुरानी…वो अक्षरशः होती श्रुति…। पूर्ण समर्पित फ़िर हो जाता…ईश समक्ष मन मेरा…,अलौकिक शक्ति की ऊर्जा का…जैसे आसपास हो घेरा…। उस परम सत्ता का जब-जब…होने लगता … Read more

ईश्वरीय आस्था ही जीवन

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. ईश्वर ही है हमारे एक संरक्षक,जो रहते हैं हर पल बने रक्षक। ईश्वर से कामना है हो सुंदर सलोना स्वरूप,प्रकृति भी धैर्य से सुनती है इसके अनुरूप। ईश्वर की आस्था और उन पर है विश्वास,यही है ज़िन्दगी का सही-सही अहसास। ईश्वरीय वरदान है यह एक नियमित आधार,इसके बिना … Read more

भौतिकवाद युग में ईश्वर व आस्था का तोल-मोल

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. हे भगवान! हे भगवान! कैसी है तेरी शान,तूने सूरज-चाँद सजाए,धरती और आकाश बनाए।मनुष्य-मनोवृत्ति की गंध में ईश्वर का मानवीय साक्षात् दर्शन करने या ईश्वर की बनाई सृष्टि के रहस्यों को खोजने की प्रथम उत्सुकता व जिज्ञासा सदैव से रही है। ब्रह्मांड व सृष्टि का रचयिता … Read more