सर्दी में गुनगुनी धूप बड़ी फायदेमंद

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** सभी जानते हैं कि स्वस्थ हड्डियों और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए विटामिन डी अति आवश्यक है। सभी विशेषज्ञों ने धूप को विटामिन डी का न केवल मुख्य स्रोत,बल्कि बुढ़ापे में अत्यन्त प्रभावकारी बताया है। हालाँकि,कुछ खाद्य पदार्थों से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है लेकिन अनुभव के आधार … Read more

अंग्रेजी को छोड़ भारत में सभी भाषा-बोलियॉं संकट में

संगोष्ठीसंवाद,समन्‍वय और सदभाव से बनेगी बात- अनिल जोशी हैदराबाद(तेलंगाना)। अंग्रेजी को छोड़ भारत में सभी भाषा-बोलियॉं संकट में हैं। कतिपय कारणों से हमारे यहॉं भाषा और बोली में एक वैचारिक द्वंद, मतभेद सामने आता रहा है। दक्षिण की बोलियों को हिंदी के बरक्‍श दुश्‍मन की तरह पेश किए जाने की प्रवृत्ति दिखती है। हालांकि उन … Read more

कड़ी प्रतिस्पर्धा में ‘शंकर दादाजी’ प्रथम व विजयलक्ष्मी ‘विभा’ द्वितीय विजेता

आभासी काव्य गोष्ठी…. इंदौर (मप्र)। लोकप्रिय वेबसाइट हिंदीभाषा डॉट कॉम द्वारा ‘गणतंत्र दिवस’ पर आयोजित आभासी काव्य गोष्ठी का बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिया गया है। इसमें पहले विजेता बनने का गौरव शंकरलाल जांगिड़( रावतसर,राजस्थान) ‘शंकर दादाजी’ ने पाया है तो प्रयागराज (उप्र) से वरिष्ठ रचनाशिल्पी विजयलक्ष्मी ‘विभा’ को दूसरा स्थान मिला है।राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार डॉ. … Read more

पूजा होती ज्ञान की

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* करो इष्ट का ध्यान,पूजा मन से कीजिए।होते ईश समान,माता-पिता को पूजिए॥ करें नहीं अपमान,मात-पिता गुरु पूज्य हैं।करें सदा सम्मान,ईश्वर से भी हैं बड़े॥ मिट जाता अज्ञान,पूजा होती ज्ञान की।मनुज ही पशु समान,ज्ञान बिना होता सदा॥ हैं जीवन के अंग,पूजा जप तप ध्यान सब।भर जाते हैं रंग,जीवन सुख से पूर्ण हो॥ योगी … Read more

बददुआ नहीं लीजिए

गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’बारां (राजस्थान)******************************** कभी किसी के दिल से,बददुआ नहीं लीजिए,सभी आबाद हो यहाँ,तुम दुआ यही कीजिए। दया,धर्म और भाईचारा,जीवन का मकसद रहे,बद से हमेशा दूर रहें,और नेकी से मतलब रहे।महके चमन हर आँगन में,कोशिश सदा यह कीजिए,कभी किसी के दिल से…। महलों-दौलत,पद-ओ-ताज का,छोड़ो करना अभिमान,भेदभाव तुम करो नहीं,मुफ़लिस-यतीम को दो सम्मान।सबके गमों-दर्द दूर करो … Read more

रच डाला इतिहास नव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* तीन रंग की चुनरी,जननी की पहचान,हिमगिरि कहता है खड़ा,मैं हूँ तेरी शान।केसरिया बाना पहन,खड़े हज़ारों वीर-अधरों पर जयहिंद है,जन-गण-मन का गान॥ अमर जवाँ इस देश के,भरते हैं हुंकार,आया जो इस ओर यदि,देंगे उसको मार।रच डाला इतिहास नव,लेकर कर शमशीर-दुश्मन का हमने किया,हर युग में संहार॥ परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान … Read more

प्रभु पर दृढ़ विश्वास

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* प्रभु पर दृढ़ विश्वास रखो तो,बनें बिगड़े काम,दूर हो जाते हैं दु:ख सभी,जप लो राम नाम। मिटे जीवन से अंधियारा,होय जग उजियारा,ज्ञान का दीपक जला मन में,मिले जीवन सार। फूल खिलें सबके जीवन में,कभी न मिले हार,प्रभु पर विश्वास रखो तो,होता बेड़ा पार। पाप कर्म कभी करना नहीं,कर पुण्य के काम,नेक काम … Read more

श्याम विरह

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** जबसे नेह लगाया तुमसे श्याम सलोने साँवरिया।इत-उत डोलूँ तुम्हें ढूँढती बनी तुम्हारी बावरिया॥ पल भर चैन पड़े ना तुम बिन अकुलाहट बढ़ती जाए,नीर झरे आँखों से ऐसे ज्यों नदिया बहती जाए।बनी जोगनी फिरूँ भटकती तुम्हें पुकारूँ श्याम पिया,इत-उत डोलूँ तुम्हें ढूँढती बनी तुम्हारी बावरिया…॥ नयनों में ले सपन तुम्हारे,नाम रटूँ हरदम … Read more

जागो,तुम ही लोकतंत्र के स्वामी

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** मतदाताओं! जागो,तुम ही,लोकतंत्र के स्वामी।बनो जागरूक मत होने दो,भारत की बदनामी॥ सत्ता लोलुप,भ्रष्टों पर है,अंकुश तुम्हें लगाना।क्रूर,निरंकुश,स्वार्थ-वृत्ति से,इसको तुम्हें बचाना॥ जाति,पंथ या संप्रदाय का,नशा न चढ़ने पाए।क्षेत्रवाद,भाषा,बोली का,भेद न बढ़ने पाए॥ अपराधी न विजय पा सकें,इसका ध्यान रहे।राजनीति,जन के हिताय है,यह पहचान रहे॥ ‘मत’ तुम्हारा बहुत कीमती,मत नीलाम करो।जान-बूझकर,सोच-समझकर,ही मतदान करो॥ परिचय–प्रख्यात … Read more

अच्छे की अच्छाई नहीं

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** अच्छे की अच्छाई नहीं,क्यों बुरे की बुराई करेंऊपर वाला मौन यहां,क्यों हम ही चतुराई करें। है स्याना,चतुर बहुत वो,हर काज हाथ उसी कामुआ जग यूँ ही जग में,क्यों हाय-हाय दुहाई करे। हाथ डोर उसी के है,तू उड़ता पंछी उसी से हैखींचने वाला खींच रहा,तू काहे को रुसवाई करे। स्थिति में बदले परस्थिति,उपस्थिति … Read more