‘नोटा’ के विकल्प की जरूरत

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ***********************************  विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बहुत दिनों से ‘नोटा'(इनमें से कोई नहीं) की सुविधा पर काफी बहस चल रही है़,पर चुनाव आयोग ने यह प्रावधान रखा होता कि यदि किसी चुनाव क्षेत्र में ५० हजार या १ लाख लोगों ने नोटा दबाया तो वहाँ दुबारा चुनाव कराए जाएंगे। तब तो नोटा दबाया … Read more

कांग्रेस और भाजपा की एकरूपता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* पंजाब,गुजरात,उत्तराखंड और कर्नाटक में जिस तरह मुख्यमंत्री बदले गए हैं,क्या इस प्रक्रिया के पीछे छिपे गहरे अर्थ को हम समझ पा रहे हैं ? किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह काफी चिंता का विषय है। इन चारों राज्यों में पिछले दिनों जिस तरह से मुख्यमंत्रियों को बदला गया है,उस तरीके में … Read more

पुण्य पथ पर चलें

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* कर्म ऐसा आप करते नित चलें।पुण्य पथ का भाव अंतर नित ढलें॥ बोलिए शुभ बोल भाषा नेक हो,हम मनुज के भाव निर्मल एक हो।द्वेष छल को त्यागकर समता पले-कर्म ऐसा आप करते नित चलें…॥ सत्य पथ की राह पर चल सर्वदा,काम आता सत्य का पथ ही सदा।बैर टूटे दूर होवे फासले-कर्म … Read more

जीवन है़ आलोकित तुमसे

उमा विश्वकर्माकानपुर (उत्तर प्रदेश)**************************************** अरुण तुम्हारे प्रकृति चरण को,नितप्रति चूमा करती है,युगों-युगों से सतत अनवरत,पृथ्वी घूमा करती है। भांति-भांति के जीव जगत में,भिन्न भिन्न हैं प्राणी,जीवन है आलोकित तुमसे,मिली चराचर को वाणीसबको अपने अंक समेटे,प्रतिपल ऊर्जा भरती है,अरुण तुम्हारे प्रकृति चरण को,नितप्रति चूमा करती है। सतत सदा निर्बाध निरन्तर,नदियाँ इसमें बहती हैं,मुझसे लेकर मुझमें आना,बादल … Read more

द्रोपदी पूछ रही है…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अन्याय होता देखकर जो बोलते नहीं,जुल्म होता देखकर मुँह खोलते नहींद्रोपदी ये पूछती है चीख-चीख आज,मौन क्यों थे जब सभा में लुट रही थी लाज ? जिस सभा में होता हो ऐसा जघन्य पाप,द्रौपदी देती है उन सभी को आज श्रापहक नहीं है जीने का…ऐसे समाज को,धिक्कार है धिक्कार है ऐसे समाज … Read more

धड़कन होती तेज

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*********************************** मन मेरा माने नहीं,कैसे रखूँ सहेज।जब-जब आती याद है,धड़कन होती तेज॥धड़कन होती तेज,करूँ क्या तुम बतलाओ।मेरे प्यारे दोस्त,तुम्हीं अब तो समझाओ॥कहे विनायक राज,आसरा अब है तेरा।मिले उसी का प्यार,चाहता है मन मेरा॥

नदी हूँ मैं

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* पानी भरी नदी हूँ मैं,पर्वतों से निकलती हूँझरने से भी जन्म लेती हूँ,मैं एक,मेरे रूप अनेक हैं।कंकड़,पत्थर,पहाड़,चट्टानें,घाटी,खेत,वन,पेड़-पौधेप्यारे-प्यारे दोस्त हैं मेरे,सबके साथ हँसते गातेआगे-आगे मैं बहती हूँ।चट्टानों से जब मैं गिरती,बहुत शोर मैं करती हूँकहीं पर पतली,कहीं गहरी,कहीं चौड़ी हो जाती हूँ।रंग है मेरा साफ नीला,बस,बरसात में मटमैली हो जाती हूँजीवन … Read more

कतई नहीं करें माँ,मातृ भूमि और मातृभाषा का अपमान

इंदौर(मप्र)। हम दूसरी भाषाओं का सम्मान करें,पर ऐसा करते वक्त अपनी मातृभाषा का अपमान कतई न करें,ना ही किसी को करने दें। अपनी भाषा,सभ्यता और संस्कृति पर अभिमान करना युवा पीढ़ी सीखे। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के विभिन्न पटल पर हिंदी में और अधिक बात की जाए ताकि हमारी अपनी भाषा को बढ़ावा मिले।देवी … Read more

नारी:कब तक बेचारगी का जीवन ?

ललित गर्गदिल्ली ************************************** हम तालिबान-अफगानिस्तान में बच्चियों एवं महिलाओं पर हो रही क्रूरता,बर्बरता शोषण की चर्चाओं में मशगूल दिखाई देते हैं लेकिन भारत में आए दिन नाबालिग बच्चियों से लेकर वृद्ध महिलाओं तक से होने वाली छेड़छाड़,बलात्कार, हिंसा की घटनाएं पर क्यों मौन साध लेते हैं ? इस देश में जहां नवरात्र में कन्या पूजन … Read more

मेरा विवाह

सुजीत जायसवाल ‘जीत’कौशाम्बी-प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)******************************************* हास्य… सुहानी फरवरी की रात,सुनाई पिता जी ने एक बात,तेरी काली करतूतों ने मुझे अब तक बहुत सताया है,इसीलिए तेरे विवाह का मेरे मन में विचार आया है। मैंने कहा-पिताजी,मैं बेचारा,मेरी कविता एक सहारा,मौज़-मस्ती के दिनों में मुझ पर कृपा फ़रमाइएमेरी शादी करा कर मुझे बलि का बक़रा ना बनाइए। सुनकर … Read more