चन्द्रप्रभा की श्वेत सुषमा

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** दिव्य भव्य सजनी यह रजनी,छवि पूर्णमासी निखार,बन कंचन कुम्भ रिक्त अवनी राका झरे मधु तुषार।कण रेणु मणि मुक्ता बन चमके,मुग्धा वेणु सप्त सूर-नृत्य मगन कर यमुना लहरी,मनभावन छाय बहार॥ दीप्त दमकत राधिका रानी,चम्पई गोपियाँ मुखार,महारास करे सौदामिनी,लपक-लपक रूप सँवार।चन्द्रप्रभा की श्वेत सुषमा,स्मृति विस्मित मेधा मुग्ध-नाच रहे मध्य जीव जुगनी,तन जीवन लीलनहार॥ परिचय–ममता … Read more

अंग्रेज से ज्यादा खतरनाक अंग्रेजी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भाजपा सरकार ने मानव-संसाधन मंत्रालय नाम बदलकर उसे फिर से शिक्षा मंत्रालय बना दिया,यह तो अच्छा ही किया लेकिन नाम बदलना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि उसका काम बदला कि नहीं ? शिक्षा मंत्रालय ने यदि सचमुच कुछ काम किया होता तो पिछले ७ साल में उसके कुछ परिणाम … Read more

फौज़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* ऐे सैनिक,फौज़ी,जवान,है तेरा नितअभिनंदन।अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन॥ गर्मी,जाड़े,बारिश में भी,तू सच्चा सेनानी,अपनी माटी की रक्षा को,तेरी अमर जवानी।तेरी देशभक्ति लखकर के,माथे तेरे चंदन,अमन-चैन का तू पैगम्बर,तेरा है अभिवंदन…॥ आँधी-तूफाँ खाते हैं भय,हरदम माथ झुकाते,रिपु तो तुझको देख सिहरता,घुसपैठी थर्राते।सीमाओं का प्रहरी तू तो,वीर शिवा का नंदन,अमन-चैन का तू … Read more

शब्द का सौंदर्य

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** शब्द के सौंदर्य को जग में सजाकर ही रहूँगा।छंद की कारीगरी को आजमा कर ही रहूँगा॥ मुक्त कविता के समय में गा रहा हूँ शब्द लय में,मुक्त तो ग्रह भी नहीं हैं व्योम गंगा के निलय में।ज्ञान पिंगल का जमाने को बताकर ही रहूँगा,छंद सौंदर्य को जग में सजाकर ही रहूंगा…॥ … Read more

सामाजिक दूरी, जरूरी

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** यह तो सर्वविदित प्रमाण है,इस भीड़-भाड़ ने खूब ली अमूल्य जान है।‘कोरोना’ के भीषण काल को,पापहम-सब याद करेंभूलने का कभी नहीं ख्याल करें।यह एक सीख के समान होगी,समझने-समझाने की बात होगी।लाखों मौतें हम-सबने देखी है यहां,नहीं हम भूल सकते हैं वह मंजर यहां।यह एक वैश्विक उबाल था,दुनिया का सबसे काला काल था।लाखों अपने लोग … Read more

काश! आज हम बच्चे होते!

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************ है अबोध यह सहज बालपन,निश्छल निर्मल चित्त मधुर है।चपल प्रकृति कोमल विमल सरल,मधुर स्नेह आवृत्त नवल है। खेलकूद कौतुक हृदय सहज,भावुक मन उद्गार मधुर है।मेधावी नित अनुकरण अपर,कौतूहल आचार प्रखर है। मनमौज़ी नित बालपन निरत,लोक नीति अनजान जान है।गंगाजल पावन प्रकृति मृदुल,अधर कुसुम मुस्कान शान है। राग द्वेष मन … Read more

कवि की दुनिया

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** आबाद रही है जिनकी दुनिया ना तो कभी यह हारी है,कवि रहता है निडर खड़ा,चाहे सामने ये दुनिया सारी है। इनके शब्दों की ताकत से धन-बल सारे हार गए हैं,पानी मांगे सब उसके आगे जब कलम बनी कटारी है। इनकी ना कोई थाह जाने,पर जब जो इनको समझा है,नाराज हुआ या … Read more

जीवन और मृत्यु

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* जीना यहाँ है मरना भी यहाँ है,मर कर लेकिन जाना कहाॅ॑ हैपूछता है मृतक,मिट्टी का तन,किधर लेकर जाएगा बता मन। मिट्टी के तन रूपी पिंजरे में,तुझे सम्भाल कर रखा थातुम्हें दु:ख-दर्द कभी भी ना हो,तुम्हें,दवा-दुआ से ढका था। जैसे तेरी बिदागिरी का खत आया,मुझे धरा पे छोड़ के तू चला गयापलट … Read more

बिखरी-सी जिंदगी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* बिखरी-सी है जिंदगी,बिखरे-बिखरे केश।देखो तो इनको जरा,सुन्दरतम् है वेश॥सुन्दरतम् है वेश,नाज-नखरे हैं करती।जब भी देखूँ रूप,हाय वो आहें भरती॥कहे ‘विनायक राज’,चंद्र-सी वो है निखरी।केश घटा घनघोर,व्योम में देखो बिखरी॥

हों कोशिशें बेहिसाब

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* सीने में जोश और बस आँखों में ख्वाब रखो,हज़ारों हों उलझनें पर कोशिश बेहिसाब रखो।रवानगी का नाम ही तो जिन्दगानी है-बस बना कर उम्मीद और हौंसला जनाब रखो॥ बुरा वक्त हमको हमारी,ताकत को बताता है,कौन अपना-कौन पराया,इसको वो जताता है।हार से भी मिलता है,अनुभव बेमिसाल-समय कठिन हमारी छिपी शक्ति दिखाता है॥ संघर्षों … Read more