मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ४ कविवर को साहित्य पढ़ने में व्यस्त देख आलोचक ने कहा,-“देखो मैं पहले समझा चुका हूँ, “जो बात एक असाधारण और निराले ढंग से शब्दों द्वारा इस तरह प्रकट की जाए कि सुनने वाले पर उसका कुछ न कुछ असर ज़रूर पड़े,उसी का नाम कविता है। आज-कल हिन्दी … Read more

अन्तिम अनुसंधान नहीं है

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ कोई अनुसंधान जगत का,अन्तिम अनुसंधान नहीं है। अनुसंधान नहीं है अन्तिम,तो है बस जीवन ही जीवनजो पा लिया उसी को पाना,बनता विषय खोज का नूतन।आदि अंत हो जिसका कोई,स्वयं यहां विग्यान नहीं है॥ मिला नहीं है कुछ भी हमको,मिलना ही मिलना है केवलमिलना ही तो वह अभाव है,जो मिल कर भी करता है … Read more

मातृ वंदना

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है।जन्म धरा है इस माटी में,जीव जगत की शान है॥ शुभ किसान जो अन्न उपजाते,वंदन उनको कीजिए,अमर शहीदों की गाथा को,मस्तक पर नित लीजिए।लहू वतन पर यहाँ दिया है,करते शुभ गुणगान है,मातृ वंदना प्रथम करूँ मैं,जन-जन का अभिमान है…॥ मातृभूमि को शीष नवाके,किया ब्रिटिश … Read more

रोज मर जाना श़गल इनका

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रोज मरते हैं जो मय्यत भी सजा सकते हैं,कैसे ज़िन्दा हैं वही लोग बता सकते हैं, अपने मरने का जो अंदाज़ दिखा सकते हैं,राज है क्या ये वही लोग बता सकते हैं। रोज मरते हैं मगर शाम तलक फिर जिन्दा ?ये किसी पर भी वो इल्ज़ाम लगा सकते हैं। रोज मर … Read more

१८ माह ने बहुत सिखाया

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** बीते १८ महीनों में हमने मानसिक तनाव बहुत झेला है। यह मानसिक कष्ट कई कारणों से रहा जिसमें प्रमुख रहा चीन पाकिस्तान के साथ युद्ध का भय व ‘कोरोना’ महामारी,परन्तु हम सभी यह भी जानते हैं कि हमारी सरकार ने चीन व पाकिस्तान दोनों पर अपना दबदबा बनाए रखा और कोरोना … Read more

कलम न्यारी

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** कोमल मन के,भाव कभी वोकट सत्य,जीवन के लिखता।कलम उसकीदोधारी है भई,कवि की दुनियातो न्यारी है।सच्चाई की,ताकत रखतारखता ख़बरजहां की सारी है,कवि कीदुनिया न्यारी है। चंद कागज़ के,टुकड़ों के बदलेबेचता नहीं,अपना वजूदअपनी कलमजान से प्यारी है,कवि कीदुनिया न्यारी है। बयां करता हैअपने ख़यालात,खोलता है राजबंद कमरों के,हल्की कलमपर सोच भारी है।कवि की तो,दुनिया … Read more

रार-हार-तकरार

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** जिंदगी है महंगी,और मौत क्यों हो गई सस्ती…??हाय रे…!!ये कैसी अनजान मस्ती।छोटी-छोटीसतही बातों पर,क्यों हो रही हैजीवन की केवलपस्ती और पस्ती (हार)?जीवन में कभी,क्या कोई हार न होगी ??क्या किसी भी स्वजन से,कभी कोई रार न होगी ??होगा प्यार ही प्यार,क्या कोईतकरार न होगी ??होगी जीत ही जीत,क्या कभी … Read more

लज्जा हीन

स्मृति श्रीवास्तव इंदौर (मध्यप्रदेश)********************************************* ‘हैलो! रजनी सब तैयारी हो गई ना ? कितना पैसा इकट्ठा हुआ है ? उसे एक लिफाफे में रख लेना,खुले पैसे देना अच्छा नहीं लगेगा।’रजनी ने जैसे ही फोन उठाया उसे सामने से केदार भाई साहब की आवाज सुनाई दी।रजनी- ‘जी भाई साहब,आप चिंता ना करें। सब तैयारी हो गई है … Read more

अधूरी जिन्दगी नारी की

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* बिना प्राण का तन नहीं सुहाए,बिना जल का नहीं होता बागपति जब दुनिया से चले जाएतो नारी का फूट जाता है भाग। अधूरा जीवन नारी का होता है,फिर कल्याणी नाम पड़ता हैभगवान क्यों बनाए ऐसी रीत,छिन जाती नारी की खुशी-प्रीत। बेचारी नारी असहाय हो जाती है,जब पति का साथ छूट जाता … Read more

समझ नहीं पाए जमाने को…

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** समझ पाए नहीं वो,जमाने की चकाचौँध कोऔर निकल पड़े वो,जमाने को समझानेबहुत कोशिश करते रहे,जमाने से वो लड़ने कीन खुद बदल पाए वो,और न बदला जमाना। हम अपने को देखें या,जमाने को देखें-समझेंऔर अपने विवेक और,बुद्धि से निष्कर्ष निकालेतभी इस जमाने में हम,और आप रह पाएंगेऔर अपनी अलग ही,एक पहचान बना पाएंगे। … Read more