मन के मनके एक सौ आठ
शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* रचना का हस्ताक्षर-भाग ४ कविवर को साहित्य पढ़ने में व्यस्त देख आलोचक ने कहा,-“देखो मैं पहले समझा चुका हूँ, “जो बात एक असाधारण और निराले ढंग से शब्दों द्वारा इस तरह प्रकट की जाए कि सुनने वाले पर उसका कुछ न कुछ असर ज़रूर पड़े,उसी का नाम कविता है। आज-कल हिन्दी … Read more