मेरे शब्द बन जाते हैं मीत

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ मेरा हर शब्द मुझसे एक रिश्ता बनाता है,मेरे शब्द-कभी रूठते हैं,कभी मान जाते हैंकुछ शब्द हो जाते हैं-माँ जैसे कोमल,कुछ बन जाते हैं-पिता की भांति कठोर,गहन अर्थों से परिपूर्णकुछ बन मेरे सखा,संग-संग करते हैं अठखेलियाँ।कुछ बन जाते हैं,बचपन के मीत से,मासूमियत के गीत सेकुछ शब्द मन में,घर कर जाते हैं,यादों की … Read more

मैं हूँ मिथ्या

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* संग चले नित झूठ दिखावा,मिथ्या नाम है।है घनिष्ठ निज छल से नाता,छलना काम है॥ भ्रमित जाल फैलाये रखती,ऐसी भावना,मनुज हृदय पर देती झूठी,मंगल कामना।दूर रहे मानव नित मुझसे,शुभ पैगाम है,संग चले नित झूठ दिखावा,मिथ्या नाम है…॥ बीच प्रेम के मैं घुस जाती,सुख निज लूटती,रिश्ते-नाते सब टूटे पर,कभी न टूटती।आँख मूँदकर जो … Read more

अपलक देखती रहूँ तुम्हें

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* तुम ही हो मेरी मांग का सिंदूर पिया।अपलक देखती रहूँ तुम्हें,भरे न जिया॥ एक पल के लिए होना न कभी ओझल,मेरी आँखों में रहो बनके तुम काजल।तुम ही आत्मा तुम ही हो परमात्मा मेरे,तुम्हारे बिन तो सूना पड़ा मेरा आँचल।तुम्हारे नयनों में बसता मेरा संसार पिया,अपलक देखती रहूँ तुम्हें,भरे न … Read more

मन नहीं लग रहा

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** सावन निकले जा रहा,दिल भी मचले जा रहाकैसे समझाएं दिल को,जो मचले जा रहालगता है अब उसको,याद आ रही उनकीजिसका ये दिल अब,आदी-सा हो चुका है। हाल ही में हुई है शादी,फिर आ गया जो सावनजिसके कारण हमको,होना पड़ा जुदादिल अब बस में नहीं है,राह देख रहा है उनकीकब आए वो यहां … Read more

इंसान हूँ मैं…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** इंसान हूँ मैं…इंसान ही बनना चाहता हूँ।कई आदर्श हैं इस जीवन केफिर भी नहीं चाहता,भगवान बनना।इंसान हूँ मैं…इंसान ही बनना चाहता हूँ॥ सब जन को है चाह…देव बन,पूजे जाएं,पर…खामियां इंसानों की,कैसे कोई छिपाएं….?लोगों की इन खामियों पर,कुछ…कहना चाहता हूँ।इंसान हूँ मैं…,इंसान ही बनना चाहता हूँ॥ कई ऐब हैं,मुझमें भी,होगी … Read more

सावन की शिवरात्रि

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** मासों में अतिरम्य है,श्रावण घटा फुहार।कांवरियों से खुशनुमा,भक्ति प्रीति उपहार॥ काले रंगों में डुबा,नीलाम्बर घनश्याम मम।इन्द्रधनुष लज्जित हुआ,देख वसन अभिराम॥ कृषकवृन्द हैं मुदित मन,शस्य श्यामला खेत।धान पौध रोपण धरा,सावन शिव संकेत॥ नव पल्लव पादप कुसुम,तज सूखा अवसाद।चख रसाल स्वादिष्ट तरु,कोकिल करे निनाद॥ वसुधानन कुसुमित खिला,सावन मास सुवास।शिव शंकर जन … Read more

सुमन

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** चुभन थोड़ी सही जिसने,सुमन उसके हुए यारों,सदा ही शुभ्र सपनों के,गगन उसने छुए यारों।लहर से हारकर जो भी,किनारे बैठ जाते हैं-साँस लेते हैं,जिंदा हैं,समझ लो हैं मुए यारों॥ परिचय-डॉ.विद्यासागर कापड़ी का सहित्यिक उपमान-सागर है। जन्म तारीख २४ अप्रैल १९६६ और जन्म स्थान-ग्राम सतगढ़ है। वर्तमान और स्थाई पता-जिला पिथौरागढ़ है। हिन्दी और … Read more

ऐसी धरती,ऐसा जहान

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** प्रेम की धरती,प्रेम का आसमानन हो अकेलापन,न ही दुखित मनजहां भी जाओ,बस मिले अपनापनप्रेम की भाषा हो,मानवता ही धर्म होक्यों नही हम बनाते,ऐसी धरती ऐसा जहान। न अमीर न गरीब,न ऊँच न कोई नीचन कोई जात न कोई पात,चारों ओर बस एक ही कातमानव की हो बस मानव ही पहचान,कर्म प्रधान … Read more

मित्र

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ सुख-दु:ख के साथी सदा,बचपन के वो यार।खेल खेलते साथ में,लगते अनुपम प्यार॥ मिलते हैं जब मित्र से,करते रहते बात।बात खत्म होती नहीं,बीते सारी रात।। हरकत बचपन की हमें,रह जाती है याद।बैठे सारे साथ में,याद बढ़ाती स्वाद॥ ऐसे मित्र बनाइये,हो उस पर विश्वास।सुख-दु:ख सबको बाँटते,होता है वह खास॥ मोबाइल जब … Read more

वीर शिशु

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)****************************************** शहीद खुदीराम बोस बलिदान विशेष…… देश-दुनिया जब अश्रुपूरित नयन में-आप हा-हा हँस रहे हो निर्भय से।होगी आपको फांसी,नहीं जानते आप क्या-ओ अग्निशिशु,फिर भी आपको नहीं है कोई चिंता।विजय का दीप्तराग लगा है आपके चेहरे पर,वीर शिशु आप,एकदम निडर।जब आपकी खेलने की उम्र,हे शिशु भोला-तब से आप खेल रहे हो लेकर अग्नि … Read more