दुखिया मन
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** कैसे कहूँ व्यथाएं अपनी समझ नहीं कुछ पाता हूँ,इन मुश्किल हालातों में मै अपना चैन गँवाता हूँ। पूर्ण नहीं कर पाया कितने देखे थे मैंने सपने,भागा था उनके पीछे पर सपने नहीं हुए अपने।देखा है विश्वास टूटते निर्बल होता जाता हूँ,इन मुश्किल हालातों…। क्या ऐसे हालात हो गये सबने नाता तोड … Read more