दुखिया मन

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** कैसे कहूँ व्यथाएं अपनी समझ नहीं कुछ पाता हूँ,इन मुश्किल हालातों में मै अपना चैन गँवाता हूँ। पूर्ण नहीं कर पाया कितने देखे थे मैंने सपने,भागा था उनके पीछे पर सपने नहीं हुए अपने।देखा है विश्वास टूटते निर्बल होता जाता हूँ,इन मुश्किल हालातों…। क्या ऐसे हालात हो गये सबने नाता तोड … Read more

मैं समय हूँ…

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** मैं समय हूँ,समय क्या है ?यह एक यक्ष प्रश्न है,समय मूल्यवान है।समय ज्ञान है,समय विज्ञान हैसमय एक बस्ती है,समय एक गाँव है।समय जीवन है,समय एक सोच हैसमय एक विचार है,समय एक आचरण है।समय प्रतिज्ञा है,समय अनुशासन हैसमय एक आचार-विचार है,समय विधान है।समय महत्वपूर्ण है,समय महान हैसमय यशस्वी है,समय समय है।इसका सत्कार करें,समय से व … Read more

शासक वाली मानसिकता हटाने के लिए ‘इंडिया’ शब्द को हटाना भी आवश्यक

संगोष्ठी…. मुंबई (महाराष्ट्र)। भारत दो हिस्सों में बंटा हुआ है। एक हिस्से का नाम इंडिया है और दूसरे का नाम है भारत। इंडिया में वे लोग रहते हैं जो संपन्न और स्वयं को भद्र कहते हैं, जबकि भारत में शेष वे सौ करोड़ लोग रहते हैं जो गुलाम बने हुए हैं। इंडिया की इस वर्ग … Read more

मन में प्यार जरूरी

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** अनमोल है मानव चोलागुरु ने है ये राज खोला,जीवन-रथ चलाने के लिएसाँसों के तार जरूरी है,हर मन में प्यार जरूरी है। गीत सजे हैं रागों मेंफूल खिले हैं बागों में,हर ओर फैली खुशबू हैमौसम में बहार जरूरी है,हर मन में प्यार जरूरी है। कठिनाइयों से डरना नहींमौत से पहले मरना नहीं,व्यर्थ की … Read more

छोटा बच्चा हूँ

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* नन्हा-मुन्ना मैं बच्चा हूँ,सभी समझते हैं मुझेछोटा बच्चा जान कर,सब तंग करते हैं मुझे। चाचा,मामा,दीदी,भैया,मुझको सभी रुलाते हैंयहाॅ॑ तक कि नाना-नानी,भी कभी-कभी सताते हैं। काश! मैं जल्दी-जल्दी,अगर बड़ा हो जाताकिसी को तंग करने का,कभी मौका नहीं आता। अब मैं ज्यादा से ज्यादा,रोज ही खाना खाऊँगा।पापा जैसा योगा करके,मैं भी बड़ा हो … Read more

ख्वाब हम भी सजा लें

अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)****************************************** हरिक बदगुमानी को दिल से निकालें,हमें तुम संभालो,तुम्हें हम संभालें। यह जीवन बिखरने लगा है अभी से,नज़र एक-दूजे की जानिब घुमा लें। अगर ग़म को बदनाम करना नहीं है,चलो बंद कमरे में आँसू बहा लें। कभी दरमियां तुम किसी को न लाना,हमें तुम मना लो,तुम्हें हम मना लें। यहां कोई अपना हितैषी … Read more

भूख की तपिश…

एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** भूख से कुलबुलाते पेट में निष्ठुर खाली थपेड़े हैं,पीठ से चिपके तन पर गरीबी के पैबंद जकड़े हैं। भूख की लाचारी में दर्द छिपाए किसे जानता है,निर्धन व्यक्ति प्रार्थना के सहारे जीवन काटता है। खाली पेट की आवाजें विवशता कहा करती है,शून्य में निहारती आँखें सब-कुछ बयां करती है। रेत पर जलती आग … Read more

इच्छाएँ

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)***************************************** बर्फ का गोला,रसीला रंग-बिरंगादोनों मुँह में रखते ही,घुल जातेजैसे माँ का स्नेह,घुल जाता बच्चों में।बढ़ती उम्र में,पोपले मुँह सेइन्हें ला कर देने का,कह नहीं पातीसोचती,लोग क्या कहेंगे।मगर हम तो भेड़ चाल में,लग जाते हैं कतार मेंइन्हें खाने की चाहत में,बच्चों के संग बन जाते हैं बच्चे।बढ्ढी माँ को पूछते नहीं,उसकी इच्छा क्या … Read more

कभी आए क्यों नहीं…

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जहर ही सही पिलाया क्यों नहीं,दस्तूरे जहाँ निभाया क्यों नहींसौगात तो कोई नहीं मांगी,थोड़ा-सा प्यार लाए क्यों नहीं। मेरा ठिकाना माना तुम हो,अपना पता बताया क्यों नहीं,बेकरारी की जाने दो ना पूछो,खामोशी से ही बुलाया क्यों नहीं। बहुत सुना था तुम सघन छाँव हो,बताओ इधर छाए क्यों नहींबादल बन गुजरते रहे आसमाँ,छाँव … Read more

मन के मनके एक सौ आठ

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* भाग १ इस लेख को रचने के लिए प्रसिद्ध साहित्यकारों की कृतियों की सहायता ली गई है,और उनके वक्तव्यों को ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है,जो एक पात्र के रूप में चरित्र-चित्रण करते हैं। विद्यार्थी,शोधार्थी व शौक या अपनी रुचि के लिए नए रचनाकार कुछेक विधाओं में लिखने के लिए … Read more