आ चल दूर से देखें दुनिया

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** चलो दिखाएं तुमको दुनिया,कितने रंग कितने बदरंग।बंध धागे उड़ान ऊपर तक,तुम उड़ना मेरे संग-संग। आओ तुम्हें मैं पँख लगा दूँ,मैं भी लगा कर फिरूं मलंग।नीलगगन में मिल मंडराए,देखे धरती हम बन विहंग। यह दुनिया बड़ी निराली है,हर चाह करने पड़ते जंग।है कठोर लोग यहाँ स्वार्थी,सम्हलना नहीं कर मति भंग। मोल नहीं यहाँ भावना … Read more

चलते रहना ही जिंदगी

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* अभी बहुत दूर जाना और जिंदगी अभी बाकी है,जोशो-ओ-जनून बने जाम-ओ-जिंदादिली बने साकी है।हर पल कुछ करते-सोचते रहो काम कोई नया तुम-ठहर गये जिस पल तो बनेगी ज़िंदगी बैसाखी है॥ यह अंत नहीं,दूसरी पारी की शुरुआत है,आप यूँ खाली नहीं लिये,अनुभव की सौगात हैं।जो अनसुलझी रही पहेली,वक्त मिला हल करने का-अपनी रुचियां … Read more

जाना होगा

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* बेशक ढेर लगाया धन का,यहीं छोड़कर जाना होगा।कर्मों के ताने बाने को , यहीं तोड़कर जाना होगा॥ लोभ मोह आपाधापी में,छूट गए सब काम जरूरी,साधन के हम दास बने हैं,हुई साधना कभी न पूरी।रहा घूमता मिथ्य शिविर में,पैर पटकता रहा तिमिर में,आसमान को छूने वाली,चाह हमेशा रही अधूरी। जिस दिन प्राण … Read more

रिमझिम बरसात

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* आई सावन की रिमझिम बरसात,कभी रिमझिम बारिश होतीकभी कभी ओले पड़ते,कभी बुलबुले बनते। देखके बबलू-डबलू हर्षित होते,कभी ओला उठाने जातेकभी बुलबुला पकड़ते,ना पकड़ाया तो रोते। बहुत नटखट हैं वह दोनों भाई,मन ही मन करते हैं चतुराईचुपके से दादी को बोला,ला के दो मुझे बुलबुला। सुनकर के बबलू-डबलू की बातें,दादा बैठे-बैठे मन … Read more

दिया नहीं…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** देश से लिया बहुत,देश को दिया नहीं।देश राग का अमिय,नेह से पिया नहीं॥देश से लिया बहुत…. भू से अन्न था लिया,श्वाँस ली समीर से।जिंदगी बची रही,शुभ्र मधुर नीर से॥ है ये पावनी धरा,गान तो किया नहीं।देश से लिया बहुत,देश को दिया नहीं॥ देश राग का अमिय,नेह से पिया नहीं।देश से लिया बहुत,देश … Read more

भारतीयता के डी.एन.ए. पर राष्ट्रवादी चिंतन

डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदीइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************** भारतीय डी.एन.ए. आज चर्चा का विषय बना हुआ है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के अनुसार सभी भारतीयों का डी.एन.ए. एक है,चाहें वो किसी मत के मानने वाले हों। स्वयं के भीतर बाबर का डी.एन.ए. मानने वालों को यह बात कितनी पचेगी यह तो समय ही बतायेगा। भारत ने सदा … Read more

अधिक सोचना ‘पुण्य कर्म’

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** इसमें कोई दो राय नहीं है कि,अधिक सोचना निस्संदेह हानिकारक होता है,परंतु जब टक्कर असंख्य बलशालियों व प्रभावशालियों से हो रही हो और जेब में फूटी कौड़ी न हो तो उन परिस्थितियों में मात्र अधिक सोचना और उस पर साहसपूर्ण कार्रवाई करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना … Read more

दर्द का एहसास नहीं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जिस दिल में दर्द का एहसास नहीं।उसे अपने-पराये का आभास नहीं। न समाज न परिवार उसका होता,वो तन्हा है बज़्म उसके पास नहीं। जवानी में तन्हा मज़े कर लो तुम,जानो समय रहता हमेशा ख़ास नहीं। जो बिगड़ चुका बुरी लतों में फंसा हुआ,उसे तो सुख हमेशा के लिये रास नहीं। जो माँ-बाप की … Read more

बदरा घिर आए

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  ***************************************** गगन घन घिरे,पवन फिर उड़ेघटा बन छायो रे,सावन आयो रे। उगेगीं अब नई कोपलें,लहराएगी बेलेंअठखेली कर रही रश्मियाँ,हरियाली खेलेघरती ने श्रृंगार किया है,रुप अनोखा पायो रे।सावन आयो रे… गुन-गुन कर रहीं चिरैया,नया संदेशा लाएभंवरे की गुंजन सुन के,कलियाँ भी मुस्काएफूलों से सज गया बगीचा,राग मल्हार सुनाए रे।सावन आयो रे… चैत की … Read more

डॉ. पुष्करणा के सृजनात्मक सामर्थ्य व समर्पण को नमन करता हूँ-प्रो.खरे

मंडला(मप्र)। सतीशराज पुष्करणा लघुकथा के मसीहा थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लघुकथा को मान्यता दिलाने व प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उनकी सृजनात्मक क्षमता को मैं नमन करता हूँ। नए लघुकथाकारों को भी उन्होंने प्रोत्साहित किया।यह बात मुख्य अतिथि लेखक प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे (म.प्र.)ने कही। अवसर था भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के … Read more