कुछ टूट रहा है परिवारों में
तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** बंट रहे हैं आजकल रिश्तेस्वार्थ की दीवारों में,ऐसा लगता है जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। नहीं रहा वो अपनापनरिश्तों में रहती अनबन,झांक रही हैं संवेदनहीनताघर में आई दरारों में,लगता है ऐसा जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। कड़ी मेहनत से घर बनायाप्यार से फिर इसे सजाया,ईंट-ईंट बंट गईबच्चों के … Read more