जीवन-सुमन खिला देना
नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** चिर-बिछोह से पीड़ित परिजन,उनका साथ निभा लेना।अपनेपन के शब्द बोलकर,अपनापन दिखला देना॥ दुखी बहुत हैं,गुमसुम भी हैं,उनका मौन भयावह है।उनके हिस्से में आया दु:ख,बेबसी का कलरव है।चुप्पी का माहौल वहाँ तो,चुप रह समय बिता देना। आशा और विश्वास से संभलें,बहते आँसू आँखों के।पोर-पोर की पीड़ा पिघले,बनते मरहम साँसों के।महक उठे उजड़े मधुवन … Read more