बच्चों की टोली

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ बच्चों की निकली है टोली।सबकी लगती मीठी बोली॥खेल खेलते बच्चे सारे।सुंदर-सुंदर प्यारे प्यारे॥ मैदानों में दौड़ लगाते।आगे-पीछे सभी भगाते॥मस्ती करते मिलकर बच्चे।सदा बोलते हैं वे सच्चे॥ बाग-बग़ीचे घूमने जाते।ताजा-ताजा फल हैं खाते॥सुबह-सुबह सब दौड़ लगाते।सब शरीर को स्वस्थ बनाते॥ खट्टी-मीठी करते बातें।साथ एक-दूजे के खाते॥पढ़ते-लिखते शाला जाते।गीत-कहानी रोज सुनाते॥

आज भी वह मेरी दीवानी

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* ये घटा सावन की सुहानी तो है,दर्दे-दिल की अपनी कहानी तो है। यादों के थपेड़े सहते मगर,उन्हीं से दिल में रवानी तो है। ख्व़ाब दिल में मचलते हैं मेरे बहुत,आज हाले-दिल उनको बताना तो है। छोड़ दूं साथ कैसे उनको ‘आजाद’,उन्हीं से रंगीन अपनी कहानी तो है। कैसे … Read more

‘हमारी उड़ान’ प्रतियोगिता के परिणाम घोषित

मुम्बई (महाराष्ट्र )। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद महिला प्रकोष्ठ मुम्बई द्वारा काव्य लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।प्रविष्टियाँ भेजने वालों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भेजा जा चुका है। अब समस्त विजेताओं को सम्मानित करने के लिए ११ जुलाई को विशेष ई-गोष्ठी की तैयारी की जा रही है।प्रतियोगिता की यह जानकारी परिषद की मुम्बई इकाई ने दी। परिषद … Read more

निर्धन

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* जग से निर्धनता मिटे,सुखी बने संसार।विनय करूँ मैं ईश से,अन्न करे बौछार॥ दीन-हीन पर कर दया,करो अन्न का दान।भूखे को भोजन मिले,कर लो धर्म सुजान॥ निर्धन मानव देखकर,अपने मुँह मत मोड़।सभी ईश संतान हैं,नजर फेरना छोड़॥ भरण करे परिवार का,फर्ज निभाये दीन।कठिन परिश्रम नित करे,हृदय रखे न मलीन॥ जान दीन दयनीय … Read more

कृष्ण प्रेम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** कृष्ण प्रेम अनुरागिनी,किये जहर का पान।मीरा दीवानी बनी,रखे हृदय भगवान॥ विष का प्याला पी गई,कृष्ण नाम स्वीकार।मीरा व्याकुल प्रेम में,छोड़ चली घर द्वार॥ साधु संत के साथ में,हरि दर्शन की प्यास।मीरा बैरागन भयी,कृष्ण मिलन की आस॥ कालिंदी तट पर खड़ी,देखे राह निहार।मोहन मेरे साँवरे,ब्रज के राजकुमार॥ वंशीधर मनमोहना,तुझे पुकारूँ आज।बिलख … Read more

यही हैं देवता

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* धरा गंदी नहीं होती गगन गंदा नहीं होता।शहीदों की चिताओं से वतन गंदा नहीं होता॥ नहीं हिन्दू नहीं मुस्लिम सिपाही तो सिपाही है,मिटा जो कौम की खातिर बना दुश्मन तबाही है।लगाओ हर दिवस मेले शहीदों की मजारों पर,निशाने हिन्द पर गाया भजन गंदा नहीं होता॥शहीदों की चिताओं से वतन गंदा नहीं … Read more

प्रियतम की प्रतीक्षा

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** बरखा बिजुरिया नील नभ मंडराई,काले बादलों संग घिर घिर आई। समीर संग खेले तितलियाँ,बाग-ए-बहार सुर्ख पत्ते हरी डालियाँ। झिलमिलाती पवन पुरवैया,घुमड़-घुमड़ आई सावन की झड़ी। भीगा मन भीगे मौसम की अंगड़ाईयाँ,मन का मयूर डोले संग तेरे ओ साथिया। परदेश बसे मोरे मन के मितवा,सूना-सूना हृदय पुकारे ओ मोरे प्रीतवा। अब … Read more

‘कोरोना’ काल में रची कविताओं पर हुई ऑनलाइन विचार गोष्ठी

मंडला(मप्र)। ‘कोरोना’ काल में रची गई कविताओं की ऑनलाइन प्रस्तुति का कार्यक्रम सिद्धेश्वर के संयोजन में आयोजित हुआ। इसमें विशिष्ट अतिथि प्रो.(डॉ) शरद नारायण खरे (म.प्र)ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल पटलों पर गतिशीलता दिखी, जहां छंद विशेषज्ञों ने श्रेष्ठतापूर्ण सृजन व सीखने-सिखाने का परिवेश बनाया। नई प्रतिभाओं की खोज की,और लोगों को साहित्य … Read more

आकांक्षा

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** जीवन में आकांक्षा होती,कुछ पाने की,कुछ बनने बनाने की,नाम कमाने की। सुख पाने-दु:ख ढहाने,शौक-मौज मनाने की,पहनने सजने-संवरने की,अच्छा खाने की। लायक नायक बनने की नर्तक या कुछ गाने की,लोगों का मन मोहने की,या मंच पर छा जाने की। अच्छा-खासा बनने की,या सिक्का जमाने की,पद प्रतिष्ठा को पाने या,पैसा-धन कमाने की। अनगिनत … Read more

नहीं सुधरता है आदमी

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ठोकर लगी तो भी नहीं सुधरता है आदमी।सच कहने को भी तो मुकरता है आदमी। जो मुँह के सामने शहद जैसी बातें करते हैं,उनको ही अपना हितैषी मानता है आदमी। ऐसी बात करने वाले ज़हर बुझे तीर होते हैं,ऐसे तीरों को नहीं पहचानता है आदमी। आस्तीन में साँप नज़र तो नहीं आते मुझे,साथ … Read more