करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more

रोशनी अपनों से है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* अंधियारे में रोशनी चिरागों से होती है,ज़िंदगी में रोशनी सच्चे अपनों से होती है। माना झूठा, फरेबी, भ्रष्ट, बेईमान है संसार,पर कुछ तो सच्चे-अच्छे दोस्त भी हैं यार। बुझा दो उन चिरागों को,जो स्वार्थ, द्वेष और कपट से जलते हैं। जोत से जोत जलाओ उन चिरागों की,जो सद्भावना, वफादारी, कर्तव्य के … Read more

राष्ट्रहित के आह्वान में भी राजनीति क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली*********************************** आज पूरी दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं ने मानव सभ्यता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और युद्ध की विभीषिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे तक प्रभावित … Read more

परिवर्तन की आहट देती ‘इंडिया नहीं भारत’ पुस्तक विमोचित

केवड़िया (गुजरात)। पराधीनता के प्रतीक ‘इंडिया’ के स्थान पर हमारे देश का नाम भारत रखे जाने का विषय अनेक वर्षों से चर्चा में रहा है। इस संबंध में लेखक द्वय डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ और डॉ. राजेश्वर कुमार द्वारा ‘इंडिया नहीं भारत’ नामक पुस्तक तैयार की गई है। गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा केवड़िया में सरदार … Read more

ममता से प्यारी इज्ज़त

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अपने ही खून से सींचा था, माँ ने उस भ्रूण को जिया थानौ महीने हाथों से पेट सहलाया था, प्यार किया, दुलार दिया, पूरा ध्यान दिया था। पर जब माँ ने नवजात किन्नर को जन्म दिया, किसे पता था कि कोख से एक ‘किन्नर’ जन्मामाँ की ममता वहीं बिखर गई, असहाय होकर ममता भी मजबूर हो … Read more

‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की ईमानदार अभिव्यक्ति

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लोकार्पण… इंदौर (मप्र)। ‘गुनगुनी धूप’ मानवीय संवेदनाओं की एक ईमानदार अभिव्यक्ति है। तनुजा जी ने बनावटी शिल्प के बजाय नैसर्गिक सौंदर्य के साथ साधारण जीवन से गहरे कथा-बीज चुने हैं। रचनाएँ अपनी नियति खुद तय करती हैं और लेखक को स्वयं अपनी रचना का पहला निर्णायक होना चाहिए।      मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, … Read more

उड़नछल्लो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ये उड़नछल्लो बनकर कहाँ चल दी ? कुछ अता-पता बता कर जाएगी ? पूछूँगी तो कहोगी- क्या अता-पता बताऊँ ?तुम्हारा जमाना गया,अब हमारा जमाना है हम लड़कियाँ क्या किसी से कम हैं ?  हाँ, हाँ, मानते हैं,तुम लड़कियाँ किसी से कम नहीं होअब तो तुम लड़कों के भी कान कतरने लगी होकिसी से कम नहीं…तो इसका … Read more

अम्मा तुम बहुत याद आती हो…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)…. अम्मा तुम बहुत याद आती हो,एक साल बीत गया…लगता है जैसे कल ही,तो तुमसे बात करी थीकितनी शांत और चैन कीनींद सो रही थीं,मानों कोई तपस्विनीमस्तक पर चंदन का टीका लगा कर,योगनिद्रा में ध्यान लगा रही होअम्मा तुम मुक्त हो गई,सांसारिक बंधनों से, शारीरिक कष्टों सेमृत्यु तो जीवन का शाश्वत … Read more

‘माँ’ एक पवित्र तस्वीर

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ का मतलब,सिर्फ़ रसोई में खड़ीचूल्हे की आँच पररोटियाँ सेंकती हुई स्त्री नहीं होता, न ही-वह केवलत्योहारों पर चरण छू लेने भर कीएक पवित्र तस्वीर है।  माँ,दरअसल वह अदृश्य संसार हैजिसके भीतर,पूरे परिवार की धड़कनें पलती हैं…जिस दिनघर के सब लोग सो जाते हैं, उस दिन भीमाँ पूरी तरह … Read more

सीप उदर माँ का

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… सीप उदर माँ का, मोती बनमैं उसकी पहचान बनी,माँ से ही यह जग पाया हैवह मेरा अभिमान बनी। जीने की वह राह बतातीवह मेरा आधार बनी,थाप हृदय पर उसके धुन कीवह मेरा अधिकार बनी। ममता, प्रेम, दया, करुणा कीमाँ प्यारी झंकार बनी,शीतल प्राण-वायु जीवन कीवह मेरा … Read more