आम… हम बेकरार
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रहते हम बेक़रार,गरमी का इन्तज़ारआम होते बेशुमार,गरमी मनाइए। आम के है वहाँ बाग,हमारे हैं बड़े भागदादी-बाबा मेरे आप,वहाँ कभी आइए। सुबह से जाते बाग,आम खाते भाग-भागतोड़ते अपने हाथ,सुख नया पाइए। बाबा पकाते आम,रखते हैं उसे पाल।तीसरे दिन निकाल,स्वाद को बढ़ाइए॥