तो फिर क्यों आ रहे हो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो, बताओ,क्या जताने आ रहे हो ? तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, तो फिर क्यों अब मुझे वापिस मनाने आ रहे होl क्यों पिंजरे में रखा था तुमने अब तक कैद करके, क्यों पिंजरे से मुझे अब तुम छुड़ाने आ रहे होl गिराया … Read more

मोदी जीत-विपक्ष को सीख

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक बधाई उनके कौशलीय विजय पर,और विपक्ष की सफलता परl एक बार की भूल क्षम्य होती है,पर बार-बार की गई भूल अपराध की श्रेणी में मानी जाती हैl जब सामनेवाला शक्तिशाली,सत्तासीन हो और उसकी निरंतर कार्यक्षमता बढ़ रही हो,उस समय यदि किसी को हराना हो तो उसके … Read more

छू लो आकाश

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ पथ दुर्गम, सदा बढ़ते जाना- खुशी या गम। छोड़ आलस, बनकर उद्यमी- छू लो आकाश। रुकना नहीं, सामर्थ्य पहचानो- झुकना नहीं। जीवन पथ, न होना विचलित- है अग्निपथ। धरना धीर, श्रम का फल मीठा- कहता ‘नीर’। परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि ५ … Read more

दिल को चीरता रोदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** बेहद दर्दनाक ख़ौफ की कालिमा सूरत की सीरत से स्तब्ध,भौंचक्का, चारों तरफ पसरा मासूम निर्दोष चीखती मौत का भष्मासुर अनल तांडव, मचा हाहाकार,दिल को चीरता रोदन कूदते,चिल्लाते,जलते देश के होनहार निर्माणक असहाय चिराग। मर्माहत सूना फिर ममता का आँचल, जला क्रूर असुर के दावानल में त्राहि-त्राहि जीवन रक्षण … Read more

मालवी की बाँसुरी `सुल्तान मामा`

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** मालवी बोली के कवि को श्रद्धांजलि हिंदी और मालवी के सुप्रसिद्ध कवि,गीतकार सुल्तान मामा हिंदी काव्य मंचों पर अपनी सुरीली आवाज के लिए पहचाने जाते थे। कवि सम्मेलन मंचों पर यदि कोई उन्हें सामने से नहीं सुन रहा हो तो कहता कि क्या खूबसूरत आवाज में कवियित्री गा रही है। … Read more

दर्द ज्यादा हो तो बताया कर

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************* दर्द ज्यादा हो तो बताया कर, ऐसे तो दिल में न दबाया करl रोग अगर बढ़ने लगे बेहिसाब, एक मुस्कराहट से घटाया करl तबियत खूब बहल जाया करेगी, खुद को धूप में ले के जाया कर, तरावट जरूरी है साँसों को भी, अंदर तक बारिश में भिगोया करl तकलीफें सब … Read more

चलो सत्य की राह पर

विरेन्द्र कुमार साहू गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ****************************************************** चारित्रिक सौंदर्य का,उदाहरण है राम। श्रेष्ठ कार्य उपमान है,दो अक्षर का नामll जिनसे संभव हानि हो,मत रख उनसे नेह। पिस्सू पशु को त्याग दे,मृत जब उनकी देहll नभ मंडल में चाँदनी,फैली है चहुँओर। लेकिन केवल चाँद पर,मोहित रहे चकोरll बुद्धि सुरक्षा के लिए,करो ईश का ध्यान। तन की रक्षा … Read more

क्या अदा है तेरी

निशा गुप्ता  देहरादून (उत्तराखंड) ************************************************************* (रचना शिल्प:काफिया-आना,रदीफ़-तेरा) याद मुझको आ गया यूँ मुस्कुराना तेरा, नजरें झुकाना झुकाकर फिर उठाना तेरा। क्या अदा है तेरी या मुझको सताना तेरा, मार डालेगा मुझे फिर बातें बनाना तेरा। सर्द आहें मेरी तुझ तक तो पहुंचेगी कभी, बैठ कर फिर अदा से चिलमन उठाना तेरा। महताब ज्यों फलक पे … Read more

भारत में भाषा का मसला:मिलकर राष्ट्रभाषा के सृजन का पुरुषार्थ करें

विजयलक्ष्मी जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************************* भारत के हित में देश के भाषाप्रेमियों को अपने-अपने आग्रह छोड़ देना चाहिए,क्योंकि अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति का यही एकमात्र तोड़ है और यही न्यायपूर्ण भी है। हिन्दी शक्तिशाली भाषा है क्योंकि वह देश के बहुसंख्यक वर्ग की भाषा है। पूरे भारत में उसके बोलने वाले पाए … Read more

एक विश्लेषण-उपन्यासों में ग्रामीण जीवन

विनोद वर्मा आज़ाद देपालपुर (मध्य प्रदेश)  ************************************************ उपन्यास आधुनिक युग की उपज है,उपन्यास वास्तविक जीवन की काल्पनिक कथा है। मुंशी प्रेमचंद के शब्दों में “मैं उपन्यास को मानव जीवन का चित्र मात्र समझता हूँ। मानव चरित्र पर प्रकाश डालना और उसके रहस्यों को खोलना ही उपन्यास का मूल तत्व है।” न्यू इंग्लिश डिक्शनरी अनुसार-“वृहद आकार गद्द्याख्यान … Read more