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दीप-दीप में फर्क

मीरा जैन
उज्जैन(मध्यप्रदेश)

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दीपमलिकाएं इठलाती,लहराती अपना प्रकाश बिखेर दीपावली पर्व को सार्थक करती हुई इतनी हर्षित थी कि,जैसे उनके प्रकाश के बगैर दीपावली का पर्व ही अधूरा हैl वह इस हर्ष में डूबी ही थी कि तेज हवा का झोंका कुछ दीपों के प्रकाश को लील गयाl शेष रोशन दीपक अपनी जीवंतता पर नाज करते हुए बुझे दीपकों को हेय दृष्टि से देख ही रहे थे कि,तेज हवा का झोंका पुनः आया और केवल एक दीपक को छोड़ सभी को प्रकाशविहीन कर गयाl
काँच के आवरण में सुरक्षित तेज हवा से बेखबर वह दीपक निरंतर जलता रहा,किंतु उसका उजास देख अन्य दीपक उससे ईर्ष्या करने के बजाय खुश हो ताली बजा रहे थे,क्योंकि गृह स्वामी ने बड़े जतन से उस दीपक को काँच के घेरे में यह कहते हुए रखा था कि-‘चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आए,तुम सदैव दैदीप्यमान रहोगेl हे दीपक! तुम साधारण नहीं,बल्कि देश की सीमा पर खड़े प्रहरियों का प्रतीक होl’

परिचय-श्रीमति मीरा जैन का जन्म २ नवम्बर को जगदलपुर (बस्तर)छत्तीसगढ़ में हुआ है। शिक्षा-स्नातक है। आपकी १००० से अधिक रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से व्यंग्य,लघुकथा व अन्य रचनाओं का प्रसारण भी हुआ है। प्रकाशित किताबों में-‘मीरा जैन की सौ लघुकथाएं (२००३)’ सहित ‘१०१ लघुकथाएं’ आदि हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-वर्ष २०११ में ‘मीरा जैन की सौ लघुकथाएं’ हैं। आपकी पुस्तक पर विक्रम विश्वविद्यालय (उज्जैन) द्वारा शोध कार्य करवाया जा चुका है,तो अनेक भाषा में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन हो भी चुका है। पुरस्कार में अंतर्राष्ट्रीय,राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय कई पुरस्कार मिले हैं। प्राइड स्टोरी अवार्ड २०१४,वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान २०१३ तथा हिंदी सेवा सम्मान २०१५ से भी सम्मानित किया गया है। २०१९ में भारत सरकार के विद्वानों की सूची में आपका नाम दर्ज है। श्रीमती जैन कई संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। बालिका-महिला सुरक्षा,उनका विकास,कन्या भ्रूण हत्या एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि कई सामाजिक अभियानों में भी सतत संलग्न हैं।

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