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परिवार की खुशी में ही अपनी खुशी

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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‘विश्व परिवार दिवस’ १५ मई विशेष……..
परिवार मनुष्य के जीवन का बुनियादी पहलू है। व्यक्ति का निर्माण और विकास परिवार में ही होता है। परिवार मनुष्य को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है। व्यक्तित्व का विकास करता है। प्रेम,स्नेह,सहानुभूति,परानुभुति आदर-सम्मान जैसी भावनाएं सिखाता है।धार्मिक क्रियाकलाप सिखाता है। धर्म स्वयं में नैतिक है। अतः बच्चा नैतिकता सीख जाता है। बच्चों में संस्कार परिवार से ही आते हैं। इसलिये प्लेटो कहते हैं कि, “परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला है।” पर आज बढ़ती महत्तवाकांक्षा के कारण संयुक्त परिवार एकाकी परिवार में टूट रहे हैं। संयुक्त परिवार के विखंडन से सर्वाधिक हानि बुजुर्गों को ही होती है । आज अधिकांश बुजुर्ग या तो किसी एक कोने में अकेलापन भोग रहे होते हैं या नौकरों के सहारे अपना जीवन काट रहे हैं, क्योंकि बेटों को स्वयं के कार्यों से फुर्सत नहीं है। कुछ बुजुर्ग तो विदेश गए अपने बेटे के वापस आने की आस में जीवन गुजार देते हैं। प्रश्न ये है कि संयुक्त परिवारों में इतना विखंडन एवं परिवर्तन आखिर क्यों हो रहा है ? तो इसके अनेक कारण हो सकते हैं। जैसे-आधुनिकता,नगरीकरण,रोजगार हेतु पलायन, महत्वकांक्षा,स्वार्थवाद,घमंड,विचारों में असमानता आदि। नगरीकरण परिवारों को नष्ट कर रहा है। व्यक्ति रोजगार हेतु नगरों के छोटे-छोटे घरों में रहने के लिए विवश है। उसके पास उतनी जगह नहीं है कि वह पूरे परिवार को साथ रख सके। बढ़ती महत्वाकांक्षा ने संयुक्त परिवारों को विखंडित किया है,लेकिन देखा जाए तो आधुनिकता गलत नहीं है। गलत वो हैं जो आधुनिकता को गलत रूप से परिभाषित करते हैं। आधुनिकता के अनेक लाभ हैं। आज तकनीकी संचार मध्यम से सम्बन्धों में निकटता आयी है। यदि हम वस्तु या व्यक्ति को लेकर मध्यम मार्ग अपनाएं परिवार को विखंडित होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए हमें अपनी सहनशीलता बढ़ानी होगी और इच्छाएं थोड़ी सीमित करनी होंगी। परिवार की खुशी में ही अपनी खुशी होती है, यह बात हमें समझनी पड़ेगी और दूसरों को भी समझानी पड़ेगी।

परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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