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नवजीवन उपहार…

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’
जयपुर(राजस्थान)
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सहज मन भीतर धर रे धीर,
समय है माना विकट गंभीर।
देखकर बाधा के शहतीर,
ना होना विचलित हे महावीर।
यही है अपना प्राणाधार,
करो इससे जीवन साकार।
रहेंगे हम संयम के साथ,
मिलेगा नवजीवन उपहारll

जैसे रहती आत्मा,
निज देह बना प्राचीर।
जान समय प्रतिकूल,
रहो तुम अपने घर में वीर।
हटेगा तम का पापाचार,
मनाएँगे मिल हर त्योहार।
रहेंगे हम सब संयम के साथ,
मिलेगा नवजीवन उपहारll

सजाओ मुख पे इक मुस्कान,
रहो मत बनकर यूँ अशक्त।
बिताओ अपनों के संग वक्त,
बनाओ रिश्तों को सशक्त।
ढ़लेगा संकट का यह ज्वार,
ना होना बेबस औ लाचार।
रहेंगे हम सब संयम के साथ,
मिलेगा नवजीवन उपहारll

करो कुछ उनका भी तो ध्यान,
कर रहे जो जन का कल्याण।
लड़ रहे संकट से इन्सान,
करो तुम उनका दिल से मान।
जगाकर मन नव ऊर्जा प्राण,
हमें पाना बाधा से पार।
रहेंगे हम संयम के साथ,
मिलेगा तब नवजीवन उपहारll

विगत पल है हमारा साखी,
कि भारत मानवता की वैशाखी।
जगत गुरू है यह पावन देश,
जगत ने बात आज यह बाखी।
उठाएँ मिल मानवता भार,
करेंगें फिर गुलशन गुलजार।
रहेंगे हम संयम के साथ,
मिलेगा तब नवजीवन उपहारll

परिचय-मनोज कुमार सामरिया का उपनाम `मनु` है,जिनका  जन्म १९८५ में २० नवम्बर को लिसाड़िया(सीकर) में हुआ है। जयपुर के मुरलीपुरा में आपका निवास है। आपने बी.एड. के साथ ही स्नातकोत्तर (हिन्दी साहित्य) तथा `नेट`(हिन्दी साहित्य) की भी शिक्षा ली है। करीब ८  वर्ष से हिन्दी साहित्य के शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और मंच संचालन भी करते हैं। लगातार कविता लेखन के साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेख,वीर रस एंव श्रृंगार रस प्रधान रचनाओं का लेखन भी श्री सामरिया करते हैं। आपकी रचनाएं कई माध्यम में प्रकाशित होती रहती हैं। मनु  कई वेबसाइट्स पर भी लिखने में सक्रिय हैंl साझा काव्य संग्रह में-प्रतिबिंब,नए पल्लव आदि में आपकी रचनाएं हैं, तो बाल साहित्य साझा संग्रह-`घरौंदा`में भी जगह मिली हैl आप एक साझा संग्रह में सम्पादक मण्डल में सदस्य रहे हैंl पुस्तक प्रकाशन में `बिखरे अल्फ़ाज़ जीवन पृष्ठों पर` आपके नाम है। सम्मान के रुप में आपको `सर्वश्रेष्ठ रचनाकार` सहित आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ सम्मान आदि प्राप्त हो चुके हैंl