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पवित्रता का प्रतीक ‘रक्षाबंधन’

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’
ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर)

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  रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। यह दो शब्दों 'रक्षा+बंधन' की संधि से बना है और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सशक्त प्रेम पूर्ण आधार देता है,जिसे रक्षाबंधन के त्योहार अर्थात पर्व के रूप में मनाया जाता है। 
  यह कच्चे धागे का वह सशक्त बंधन है,जिसके अनेक अध्यात्मिक महत्व हैं। इसे श्रावण मास में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। यह भाई एवं बहन के भावनात्मक संबंधों का अद्वितीय पर्व है‌‌,जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर कच्चा धागा बांधती है और उसके दीर्घायु जीवन एवं सुरक्षा की कामना करती है। फलस्वरूप बहन के स्नेह में बंध कर भाई उसकी रक्षा का संकल्प करता है।
  प्रेरणादायक उपरोक्त पर्व वर्तमान में मात्र भाई-बहन का ही पर्व न रह कर धर्म की रक्षा,वृक्षों की रक्षा एवं राष्ट्र की रक्षा इत्यादि के लिए भी प्रयोग होने लगा है,जो राष्ट्रीय एकता व भाईचारे का भी प्रतीक बन कर उभर रहा है। सीमा पर सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों की कलाई पर राखी बांध कर कई बहनें पर्व की हिन्दू सांस्कृतिक परम्परा को भी निभा रही हैं।
  इस वर्ष भी यह पर्व उसी उत्साह से मनाया गया,जिसमें कोरोना विषाणु बाधक था,परंतु भाई -बहन की अटूट स्नेही डोर को विशेष प्रभावित नहीं कर पाया,क्योंकि भारतीय परम्पराओं का यह एक ऐसा पर्व है,जिसकी भावनाओं एवं संवेदनाओं को कोई रोक नहीं सकता, क्योंकि कोसों दूर से ही यह मन की तरंगों से कुशलतापूर्वक मनाया जा सकता है,जिसके लिए बहनें पहले से ही प्रण किए बैठी होती हैं।

दूसरी ओर यूँ भी बहनें भेंट स्वरूप भाई से तलवार की मांग कर रही हैं,ताकि वह बुराईयों को स्वयं काट सकें। वैसे भी वह सेना में भर्ती होकर अपना सम्पूर्ण दायित्व निभा रही हैं और युद्धक अस्त्रों-शस्त्रों से परिपूर्ण विमानों को उड़ा कर शत्रु के क्षेत्र में बम-वर्षा कर दांत खट्टे कर स्वयं एवं भारत को आत्मनिर्भर बना रही हैं,जो उज्जवल एवं सुनहरे भविष्य का प्रतीक है।

परिचय–इंदु भूषण बाली का साहित्यिक उपनाम `परवाज़ मनावरी`हैl इनकी जन्म तारीख २० सितम्बर १९६२ एवं जन्म स्थान-मनावर(वर्तमान पाकिस्तान में)हैl वर्तमान और स्थाई निवास तहसील ज्यौड़ियां,जिला-जम्मू(जम्मू कश्मीर)हैl राज्य जम्मू-कश्मीर के श्री बाली की शिक्षा-पी.यू.सी. और शिरोमणि हैl कार्यक्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों से लड़ना व आलोचना है,हालाँकि एसएसबी विभाग से सेवानिवृत्त हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पत्रकार,समाजसेवक, लेखक एवं भारत के राष्ट्रपति पद के पूर्व प्रत्याशी रहे हैंl आपकी लेखन विधा-लघुकथा,ग़ज़ल,लेख,व्यंग्य और आलोचना इत्यादि हैl प्रकाशन में आपके खाते में ७ पुस्तकें(व्हेयर इज कांस्टिट्यूशन ? लॉ एन्ड जस्टिस ?(अंग्रेजी),कड़वे सच,मुझे न्याय दो(हिंदी) तथा डोगरी में फिट्’टे मुँह तुंदा आदि)हैंl कई अख़बारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl लेखन के लिए कुछ सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैंl अपने जीवन में विशेष उपलब्धि-अनंत मानने वाले परवाज़ मनावरी की लेखनी का उद्देश्य-भ्रष्टाचार से मुक्ति हैl प्रेरणा पुंज-राष्ट्रभक्ति है तो विशेषज्ञता-संविधानिक संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम में जीवन समर्पित है।

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