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चला गया अभिनय जगत का `यशस्वी योद्धा`

ललित गर्ग
दिल्ली

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बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता ऋषि कपूर ने मुंबई के अस्पताल में ३० अप्रैल को अपनी अंतिम साँसें ली। ६७ वर्ष की उम्र में कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से लड़ते हुए वे जिन्दगी एवं मौत के बीच जूझते हुए हार गए। एक संभावनाओं भरा हिन्दी सिनेमा का सफर ठहर गया,उनका निधन न केवल सिनेमा-जगत के लिए,बल्कि भारत की राष्ट्रवादी सोच के लिए एक गहरा आघात है। ऋषि का जीवन-सफर आदर्शों एवं मूल्यों की सोच एवं सृजन की ऊंची मीनार है। उनका निधन रोमांटिक फिल्मों के एक युग की समाप्ति है,क्योंकि कल उनकी रफ्तार की मिसालें थी,आज उनकी खामोशी के चर्चें हैं।
ऋषि कपूर की पहचान उनकी रोमांटिक फिल्मों से है,और उन्होंने `रोमांस का किंग` भी कहा जाता है। कहा जाता है कि ऋषि ने अपने करियर में १-२ नहीं,बल्कि ९० से ज्यादा रोमांटिक फिल्में की थी और उनके कई किरदार तो रोमांटिक फिल्मों के लिए मिसाल बन चुके हैं। अगर आज भी बॉलीवुड में रोमांस की बात की जाती है,तो सबसे पहले `सरगम` में ढपली बजाते हुए ऋषि कपूर ही नजर आते हैं। उन्होंने वैसे तो बाल अभिनेता ही फिल्मों में कदम रख लिया था। ऋषि कपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ से बाल कलाकार के रूप में अपना फिल्मी सफर शुरू किया था। हालांकि,इससे पहले ऋषि कपूर ‘श्री ४२०’ में ‘प्यार हुआ इकरार हुआ…’ गाने में भाई रणधीर कपूर और रीमा के साथ पैदल चलते दिखे थे। फिल्म में अपने किरदार के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। बतौर अभिनेता उनकी फिल्म `बॉबी`(१९७३) थी,जिसमें वह डिंपल कपाड़िया के साथ नजर आए थे। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्म फेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार (१९७४) में मिला था। ऋषि कपूर की छवि एक रोमांटिक नायक की थी। उन्हें दर्शकों ने रोमांटिक अंदाज में काफी पसंद भी किया। यही वजह है कि ऋषि ने ९२ रोमांटिक फिल्मों में काम किया,जिनमें से ३६ फिल्में महाकामयाब साबित हुईं। इनमें-`कर्ज,दीवाना,चाँदनी,सागर,अमर अकबर एंथनी और हिना` जैसी फिल्में शामिल हैं। साल २००० के बाद ऋषि कपूर अक्सर सहायक भूमिकाओं में नजर आने लगे,जिसमें ‘हम तुम’, ‘फना, ‘नमस्ते लंदन’ तथा ‘हाउसफुल टू’ आदि फिल्में शामिल हैं।
ऋषि कपूर की पत्नी नीतू सिंह के साथ रोमांटिक जोड़ी काफी पसंद की जाती थी। दोनों ने तकरीबन १२ फिल्मों में साथ काम किया। इनमें `खेल-खेल` में,`कभी कभी` तथा `पति पत्नी और वो` सफल साबित हुईंl हिन्दी सिनेमा के पास इनसे ज्यादा नटखट जोड़ी दूसरी नहीं थी। वे परी-कथाओं के जैसा प्यार रचते हुए ताजगी का एहसास बांटते हुए दर्शकों के दिलों की धड़कन बने।
ऋषि कपूर महासितारा रहे थे,जिनकी जिंदगी हमेशा एक खुली किताब की तरह रही। उन्होंने कई बार अपनी जिंदगी से जुड़े ऐसे खुलासे किए,जिनके बारे में बात करने से भी लोग कतराते हैं। ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा `खुल्लम खुल्ला:ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ में बताया कि उन्होंने एक बार अमिताभ बच्चन को ‘जंजीर’ फिल्म के लिए मिलने वाला फिल्म फेयर अवार्ड पैसे देकर खरीदा था,जिसकी वजह से दोनों कलाकारों के बीच कुछ दूरी भी आ गई थी,लेकिन बाद में दोनों सितारों के बीच संबंध बहुत मधुर रहे और दोनों ने अनेक फिल्में साथ में की। यही कारण है कि ऋषि के निधन पर अमिताभ ने कहा कि मैं टूट गया हूँ।’
ऋषि कपूर को हम भारतीय सिनेमा का उज्ज्वल नक्षत्र कह सकते हैं,वे चित्रता में मित्रता के प्रतीक थे तो गहन मानवीय चेतना के चितेरे जुझारु,निडर, एवं प्रखर व्यक्तित्व थे। वे एक ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व थे,जिन्हें अभिनय जगत का एक `यशस्वी योद्धा` माना जाता है। उन्होंने आमजन के बीच हर जगह अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। लाखों-लाखों की भीड़ में कोई-कोई ऋषि जैसा विलक्षण एवं प्रतिभाशाली व्यक्ति अभिनय-विकास की प्रयोगशाला मेें विभिन्न प्रशिक्षणों-परीक्षणों से गुजरकर महानता का वरन करता है,और अपनी अनूठी अभिनय क्षमता,मौलिक सोच,कर्मठता, जिजीविषा,पुरुषार्थ एवं राष्ट्र-भावना से सिनेमा-जगत,समाज एवं राष्ट्र को अभिप्रेरित करता है। वे वर्तमान `कोरोना` महासंकट के समय पुलिसकर्मियों और चिकित्सा दल को पीटने की घटनाओं को लेकर बहुत दुःखी थेl
ऋषि कपूर एक ऐसे जीवन की दास्तान है,जिन्होंने अपने जीवन को बिन्दु से सिन्धु बनाया है। उनके जीवन की दास्तान को पढ़ते हुए जीवन के बारे में एक नई सोच पैदा होती है। ऋषि के जीवन कथानक की प्रस्तुति को देखते हुए सुखद आश्चर्य होता है एवं प्रेरणा मिलती है कि जीवन आदर्शों के माध्यम से भारतीय सिनेमा,राजनीति,पारिवारिक, सामाजिक,राष्ट्रीय और वैयक्तिक जीवन की अनेक सार्थक दिशाएँ उद्घाटित की जा सकती हैं। वे आदर्श जीवन का एक अनुकरणीय उदाहरण हैंl उनका निधन एक जीवंत,प्यारभरी सोच के सिनेमा का अंत है। आपके जीवन की खिड़कियाँ सिनेमा-जगत, समाज एवं राष्ट्र को नई दृष्टि देने के लिए सदैव खुली रही। उनकी सहजता और सरलता में गोता लगाने से ज्ञात होता है कि वे गहरे मानवीय सरोकार से ओतप्रोत एक अल्हड़ व्यक्तित्व थे। बेशक ऋषि कपूर अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने सफल,सार्थक एवं जीवंत अभिनय के दम पर वे हमेशा भारतीय सिनेमा के आसमान में एक सितारे की तरह टिमटिमाते रहेंगे।