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सोचें,आज नहीं तो कल

कमल किशोर दुबे कमल 
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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सोचें आज नहीं तो कल।
भाग-दौड़ की इस दुनिया में, कितनी मारा-मारी है।
भाग रहा दौलत के पीछे,राजा बना भिखारी है॥
खाना-पीना,सुखमय जीना, दौलत सबको प्यारी है।
भाग-दौड़ की धमा-चौकड़ी, जीवन घटता है पल-पल॥

सोचें आज नहीं तो कल।
रिश्ते-नाते,प्यार-मुहब्बत,तौले जाते हैं धन में।
किससे, कैसे मिले फायदा, नित सोचे मानव मन में॥
धूल,धुँआ का ज़हर,रसायन, फैल रहे वन-उपवन में।
पर्यावरण बिगाड़ा हमने,दूषित जल,काटे जंगल॥

सोचें आज नहीं तो कल।
सबके अपने-अपने वाहन, धूल, धुँआ फैलाते हैं।
राजनीति में धर्म,जाति के, हथकंडे अपनाते हैं॥
मानव मन में ज़हर घोलते,नेता नहीं अघाते हैं।
सबकी अपनी-अपनी मंज़िल, दुनिया है कितनी पागल॥

सोचें आज नहीं तो कल।
ठाठ-बाट धन्नासेठों के,फूले नहीं समाते हैं।
युवा बेटियों संग पिता भी, आज नाचते -गाते हैं।
संस्कार हैं तार-तार अब, नैतिकता होती धूमिल॥

सोचें आज नहीं तो कल…।

परिचय-कमल किशोर दुबे का साहित्यिक उपनाम-कमलहैl आपकी जन्मतारीख २६ दिसम्बर १९५८ और जन्म स्थान- पिपरिया(जिला-होशंगाबाद,म.प्र.) हैl वर्तमान में भोपाल स्थित होशंगाबाद रोड पर निवासरत हैंl मध्यप्रदेश निवासी श्री दुबे ने बी.एस-सी.सहित एल.एल.बी.,बी.जे.एम.सी. और एम.सी.जे.(पत्रकारिता)की उपाधि प्राप्त की हैl इनका कार्यक्षेत्र-भारतीय रेल में वरिष्ठ जन सम्पर्क अधिकारी (सेवानिवृत्त) का रहा हैl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आपके द्वारा व्यक्तित्व विकास हेतु प्रेरणा एवं साहित्य लेखन जारी हैl लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल, व्यंग्य लेख तथा कहानी है। प्रकाशन के निमित्त-पंखुड़ियाँ गुलाब की(काव्य संग्रह-२००४),दोषी कौन (कहानी संग्रह-२००४),मुहब्बत का चिराग़ (ग़ज़ल संग्रह-२०१४)सहित गधा यहीं का(व्यंग्य संग्रह-२०१७) किताबें आ चुकी हैं तो श्रीहरि सरल गीता( श्रीमद्भगवद्गीता का दोहे-चौपाई में हिन्दी काव्यानुवाद प्रकाशन हेतु तैयार हैl आपकी रचनाओं प्रकाशन विभिन्न दैनिक समाचार पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। आपको प्राप्त सम्मान में सुधा वाणी सम्मान,साहित्य मनीषी सम्मान,पवैया पुरस्कार तथा कादम्बिनी साहित्य अलंकरण प्रमुख हैंl विशेष उपलब्धि-मध्य प्रदेश शासन की सुप्रसिद्ध `लाड़ली लक्ष्मी` योजना के विज्ञापन-वर्ष 2008 में बेटियाँ कविता का उपयोग,पश्चिम रेल विभाग की पत्रिकाओं का सम्पादन एवं भोपाल के चर्चित कवि-२०१० में सम्मिलित होना हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-समाज में फैली भ्रांतियों,भ्रष्टाचार,सामाजिक विद्रूपताओं,विसंगतियों को उजागर करना तथा समाज में विकासोन्मुखी,सांस्कृतिक,राष्ट्रीयता की भावना की प्रेरणा और विकास करना है। आपकी लेखनी के लिए प्रेरणा पुंज-जन महाकवि गोपालदास `नीरज`,गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज हैं। श्री दुबे की विशेषज्ञता-जनसम्पर्क,ग़ज़ल एवं व्यंग्य लेखन में है। रुचियाँ -साहित्य लेखन,पढ़ना-पढ़ाना,कवि सम्मेलनों-काव्य गोष्ठियों में भागीदारी है।

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