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पानी है अनमोल

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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क्षिति जल पावक नभ पवन,जीवन ‘विज्ञ’ सतोल।
जीवन का आधार वर,पानी है अनमोल॥

मेघपुष्प,पानी,सलिल,आप: पाथ: तोय।
‘विज्ञ’ वन्दना वरुण की,निर्मल मति दे मोय॥

जनहित जलहित देशहित,जागरूक हो ‘विज्ञ।’
जीवन के आसार तब,जल रक्षार्थ प्रतिज्ञ॥

वारि अम्बु जल पुष्करं,अम्म: अर्ण: नीर।
उदकं,घनरस शम्बरं, ‘विज्ञ’ रक्ष मतिधीर॥

सरिता तटिनी तरंगिणी,द्वीपवती सारंग।
नद सरि सरिता आपगा,जलमाला जलसंग॥

अपगा लहरी निम्नगा,निर्झरिणी जलधार।
सदा सनेही सींचती,कर लो ‘विज्ञ’ विचार॥

स्वच्छ रखो जल ‘विज्ञ’ नर,नहीं प्रदूषण घोल।
नयन नीर नर नारि रख,पानी है अनमोल॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

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