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देखने दे मुझे रंगीन दुनिया माँ..

दृष्टि भानुशाली
नवी मुंबई(महाराष्ट्र) 
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देखने दे मुझे यह रंगीन दुनिया माँ,
यह नीला गगन,हरे पेड़ और रंगीन फूलों का जहाँ।
मेरे आने की खबर सुन, तू खुशी से झूम उठी,
जब ज्ञात हुआ कि बेटी हूँ तो क्यों शर्मिंदा तू हो गई ?

तेरे घर में आगमन होगा,
एक लक्ष्मी स्वरूप बेटी का।
यह सुनकर शर्मिंदा नहीं,
तू गुरूर कर मेरे आने का॥

वादा करती हूँ माँ,
जन्म लेते ही सुलझ जाऊँगी।
पापा से कहना फिक्र ना करें,
मैं भईया की किताबों से ही पढ़-लिख लूँगी॥

साफ-सफाई से लेकर बरतन-कपड़ों तक,
सारे कार्य शीघ्र सीख जाऊँगी।
वादा करती हूँ आपसे कि,मेरी,
आहट से आपको परेशान नहीं करूंगी॥

पापा को संदेश देना कि,
मेरे दहेज की चिंता ना करें।
आपके निकट रहकर मैं,
आपके बुढ़ापे का सहारा बनूँगी॥

अब तक तो मेरी हथेली की,
लकीरें भी तुमने बनने नहीं दी।
और बोझ समझकर मेरी किस्मत तुमने,
स्वयं के हाथों ही लिख दी…॥

इतनी जल्दी सुना दिया तुमने,
मेरी जिंदगी का यह फैसला।
सोच लिया इस नन्हीं-सी जान को,
जन्म से पहले ही मार देना!!

परिचय-दृष्टि जगदीश भानुशाली मेधावी छात्रा,अच्छी खिलाड़ी और लेखन की शौकीन भी है। इनकी जन्म तारीख ११ अप्रैल २००४ तथा जन्म स्थान-मुंबई है। वर्तमान पता कोपरखैरने(नवी मुंबई) है। फिलहाल नवी मुम्बई स्थित निजी विद्यालय में अध्ययनरत है। आपकी विशेष उपलब्धियों में शिक्षा में ७ पुरस्कार मिलना है,तो औरंगाबाद में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए फुटबाल खेल में प्रथम स्थान पाया है। लेखन,कहानी और कविता बोलने की स्पर्धाओं में लगातार द्वितीय स्थान की उपलब्धि भी है,जबकि हिंदी भाषण स्पर्धा में प्रथम रही है।

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