राधा गोयल
नई दिल्ली
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किसी और के बाद है अब मथुरा की बारी,
पूरा करके रहेंगे, अब न कोई लाचारी
एक वर्ग को ये सपना कुछ रास न आया है,
देखो आज इतिहास ने खुद को फिर दोहराया है।
जिसे सहारा दोगे यहाँ पर, वही करेगा घात,
मौका मिलते ही दिखलाएगा, अपनी औकात
‘विश्वगुरु’ का सपना रह जाएगा बनकर ख्वाब,
उनकी नीच हरकतों का, यदि दिया न कोई जवाब।
देश मिटाने की खातिर, वो घूम रहे हैं,
नित्य नई-नई योजनाएं, वो बना रहे हैं
जगह-जगह पर आगजनी और पत्थरबाजी,
उनके कारण कितने ही हारे, अपने जीवन की बाजी।
बिक गए हम सब दो कौड़ी में, सफल हुए गद्दार,
भूल गए पुलवामा, जब पीछे से किया था वार
कुल्हाड़ी पर खुद अपना ही पाँव चलाया है,
क्यों ऐसे लोगों का, न नामो- निशां मिटाया है?
आतंकवादियों से हमदर्दी, रखते हैं जो लोग,
आतंकवादियों की श्रेणी में, आते हैं वे लोग।
जब तक ऐसे लोगों का खात्मा नहीं होगा,
शान्ति का सपना कभी, साकार नहीं होगा।
हम निर्माण करेंगे, वे विध्वंस करेंगे उसको,
बतलाओ कब तक बर्दाश्त करोगे उनको ?
अपने देश में हमको अपनों ने ही सताया है।
इज्जत लूटने वालों को ही, सर पे बिठाया है।
सर्व-धर्म सद्भाव छोड़, अब अपना धर्म निभाओ,
अपने देश का नहीं हुआ जो, उनका नाम मिटाओ।
अब शठ को शठ की भाषा में ही समझाना होगा,
गोली का जवाब अब गोले से देना होगा॥