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वास्तविक खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…

हर मनुष्य की अपनी-अपनी इच्छाएँ होती हैं। वह अपनी इच्छाओं को समाज में साकार होते देखना चाहता है और उनकी पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास करता है। इच्छाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक भी होती हैं। एक व्यक्ति की सकारात्मक इच्छाएँ समाज को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। जब किसी विद्यार्थी की इच्छा पूरी होती है और वह आई.पी.एस. अधिकारी बन जाता है, तो न केवल उसके परिवार का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है, बल्कि समाज के अन्य विद्यार्थियों को भी नई दिशा और हौसला मिलता है। ऐसा अधिकारी अपने आसपास के लोगों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन जाता है और आशा की लौ जगा देता है।
             एक लड़की के मन में आई.ए.एस. अधिकारी बनने की दृढ़ इच्छा थी। उसने बहुत मेहनत की, परंतु परीक्षा में सफलता न मिलने के कारण वह केवल सिपाही बन सकी। इस कारण वह अत्यंत निराश हो गई। धीरे-धीरे उसका स्वास्थ्य भी गिरने लगा और स्थिति गंभीर हो गई। जब उसने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की, तो उसने कहा कि वह एक अधिकारी बनना चाहती थी, परंतु ऐसा न हो सका। चिकित्सक ने भी बताया कि उसकी बीमारी का एक बड़ा कारण मानसिक तनाव और निराशा है, जो उसकी अपूर्ण इच्छा से जुड़ी है।
जब यह बात एक आई.ए.एस. अधिकारी तक पहुँची, तो वे उसके घर आए और परिवार से मिले। उन्होंने उस लड़की को अपने कार्यालय में बुलाकर कुछ समय के लिए अपनी कुर्सी पर बैठने का अवसर दिया। वह केवल ५ मिनट उस कुर्सी पर बैठी, परंतु उसके लिए यह क्षण अत्यंत संतोषदायक था। उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए और उसके चेहरे पर नई चमक दिखाई दी। इसके बाद धीरे-धीरे उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और वह स्वस्थ हो गई।
   इसी प्रकार, एक अन्य घटना में एक बच्ची की आँखें बहुत कमजोर हो गई थीं। वह बहुत निराश रहती थी। उसकी इच्छा थी, कि वह फिर से सामान्य रूप से देख सके। परिवार के सहयोग, उचित उपचार और सकारात्मक वातावरण के कारण उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। कुछ समय बाद उसकी आँखों की स्थिति बेहतर हो गई। आज वह सामान्य जीवन जी रही है। इस घटना से स्पष्ट होता है कि आशा, सकारात्मक सोच और सहयोग से स्वास्थ्य में भी सुधार संभव है।
   इस प्रकार स्पष्ट है, कि इच्छा-पूर्ति केवल मन को शांति नहीं देती, बल्कि व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
  ‘विश्व इच्छा दिवस’ केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि आशा और आनंद का प्रतीक है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बच्चों के जीवन में खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है, जो गंभीर या लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे होते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन की वास्तविक खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में है। आज के आधुनिक युग में जीवन की गति अत्यंत तेज हो गई है। लोग अपनी महत्वाकांक्षाओं में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि इच्छाएँ केवल स्वयं तक सीमित रह जाती हैं। ऐसे समय में इच्छा दिवस हमें यह सीख देता है कि हमारी इच्छाएँ दूसरों के जीवन में भी खुशियाँ ला सकती हैं।इसलिए आशा, प्रेम और खुशियाँ जगाएं।
मेरी भी इच्छा थी कि मैं आई.ए.एस. अधिकारी बनूँ, परंतु यह संभव नहीं हो सका। इस अधूरी इच्छा ने मुझे निराश करने की बजाय समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। मैंने एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थापना की, जहाँ अत्यंत कम शुल्क पर बच्चों को शिक्षा दी जाने लगी। प्रारंभ में २० ₹ की फीस से विद्यालय चला, जो आज भी अन्य की तुलना में बहुत कम है।
शुरुआत में एक छोटे से स्थान से आरंभ हुआ यह प्रयास आज सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रहा है। पहले जो बच्चे विद्यालय आने से झिझकते थे, आज वही बच्चे चिकित्सक, अभियंता, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बैंक पी.ओ., प्राध्यापक और वकील बन चुके हैं। कुछ बच्चे विदेशों में भी अपने कार्य से देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
  आज मुझे इस बात का संतोष है कि भले ही मेरी व्यक्तिगत इच्छा पूर्ण न हो सकी, परंतु मैं हजारों बच्चों की इच्छाओं को पूरा करने का माध्यम बन सकी। इस कार्य में मेरे परिवार और विशेष रूप से पति का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। यह प्रयास आज भी सफलतापूर्वक और प्रेरणादायक ढंग से चल रहा है।
    अंततः, इच्छा दिवस हमें यह सिखाता है कि सच्ची खुशी केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति में नहीं, बल्कि दूसरों की इच्छाओं को पूरा करने में भी निहित है।