युवा शक्ति

देवेन्द्र कुमार ध्रुव
गरियाबंद(छत्तीसगढ़ )
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जिसके हर एक अक्षर में नित नया सन्देश हो,
हर अंश में जिसके कोई ना कोई उपदेश हो
मुश्किल से मुश्किल सवालों का जवाब बनो,
जिसे सभी पढ़ ले,नौजवानों ऐसी किताब बनो।

मेहनत करना आगे बढ़ना लक्ष्य को साधकर,
नसीब के भरोसे मत बैठो,हाथों को बांधकर
एक नया इतिहास बने,नया मिसाल कायम हो,
मंजिल भी पता पूछे,नौजवानों कामयाब बनो।

दबने नहीं देना अपने अंदर की प्रतिभा को,
खुद तुम्हें कायम करनी है अपनी प्रतिष्ठा को
तारों की तरह चमकना,चाँद-सा नूर बरसाना,
जग को रौशनी देने,नौजवानों आफताब बनो।

माना जिंदगी में बहुत-सी चुनौतियां आयेंगी,
तुम्हें परखने ऐसे ही कई कसौटियां आयेंगी
चाहे कोई भी मौसम हो कभी ना मुरझाना,
काँटों के साये में भी,नौजवानों गुलाब बनो।

अस्मिता देश की बचाने,सब-कुछ झोंक देना,
शत्रुओं के हर वार को तुम,सीने में रोक लेना
रहना गंगाजल-सा पावन तुम अपनों के लिए,
अपने दुश्मनों के लिए,नौजवानों तेजाब बनोll

परिचय- देवेन्द्र कुमार ध्रुव का स्थाई निवास छत्तीसगढ़ के ग्राम बेलर(जिला-गरियाबंद)में है। इनकी जन्म तारीख २४ अक्टूबर १९८८ एवं जन्म स्थान-बेलर (फिंगेश्वर)है। शहर बेलर से सम्बन्ध रखने वाले देवेन्द्र जी की शिक्षा-स्नातकोत्तर और कार्यक्षेत्र-अध्यापन(सहा. शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सक्रिय सहभागिता से विभिन्न आयोजनों में संचालन करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,मुक्तक तथा ग़ज़ल है। रचनाओं का प्रकाशन आंचलिक पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है।जिला स्तर पर आप साहित्यकार सम्मान पा चुके हैं। विशेष उपलब्धि-आंचलिक कवि सम्मेलनों में सहभागिता है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-मन की बातें सबके सम्मुख रखना और हिन्दी का प्रचार करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-पिताजी की कविता है। रुचि लेखन में ही है।

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