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अभिनन्दन

कपिल कुमार जैन 
भीलवाड़ा(राजस्थान)
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अभिनन्दन है,अभिनन्दन,अभिनन्दन है,अभिनन्दन,
साहस की इस बेला पर करते,हम सब जन मिलकर वंदन।

सौभाग्य अपना है ये कि,आप हमारे बीच पधारे,
नहीं बता सकते हैं कितने,हर्षित जन गन मन सारे।
रजधूली पे कदम पड़ा तो,महक उठी है रज कण-कण।
अभिनन्दन है,अभिनन्दन,अभिनन्दन है,अभिनन्दन…॥

एक निवेदन को स्वीकारें,सभी आपके आभारी,
मान बढ़ाये-शान बढ़ाये,रोशन हो जग में ख्याति तुम्हारी।
जय-जय बोल रहे हैं सब ही,होकर के चन्दन-चन्दन,
अभिनन्दन है,अभिनन्दन,अभिनन्दन है,अभिनन्दन…॥

अभिमान हो तुम मातृभूमि का,हमको नहीं निराश किया,
दरस आपके मानो जिसने,दिल में परम् उजास किया।
होता रहे आपका हरदम,आगमन अब तो श्रीमन,
अभिनन्दन है,अभिनन्दन,अभिनन्दन है,अभिनन्दन॥

परिचय-कपिल कुमार जैन की जन्म तारीख १२ जनवरी १९८८ और जन्म स्थान-टोडारायसिंह(टोंक)है। वर्तमान में राजस्थान राज्य के भीलवाड़ा में स्थाई रुप से बसे हुए हैं। श्री जैन को भाषा ज्ञान-हिन्दी,इंग्लिश,संस्कृत एवं मारवाड़ी का है। राजस्थान वासी कपिल जैन ने स्नातक(वाणिज्य) की शिक्षा प्राप्त की है। इनका कार्यक्षेत्र- नौकरी(खरीदी प्रबंधक)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत संस्था से जुड़े होकर समाजसेवा करते हैं। लेखन विधा-काव्य (अतुकांत कविता)है। प्रकाशन के तौर पर किताब(कवि हम तुम)आ चुकी है तो ऑनलाइन पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपको लेखन के लिए प्रकाशन से सम्मान-पत्र मिल चुके हैं। श्री जैन की लेखनी का उद्देश्य-आत्म सन्तुष्टि है। इनके पसंदीदा लेखक-मुंशी प्रेमचंद,पाब्लो नेरूदा,ओशो तथा दिनकर विशेष हैं। प्रेरणा पुंज-ओशो हैं। इनकी विशेषज्ञता-अतुकांत कविता लेखन में है।