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आज-कल

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’
मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) 
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पास आता नहीं कोई भी आज कल।
दिल लगाता नहीं कोई भी आज कल।

जिसको देखो वो लड़ने पे तैयार है।
बात खाता नहीं कोई भी आज कल।

मालो ज़र तो दबाते हैं सब शौक़ से।
पा दबाता नहीं कोई भी आज कल।

ज़ुल्म सहते हैं चुपचाप सब देखिए।
लब हिलाता नहींं कोई भी आज कल।

जाने क्यों हमसे सब लोग नाराज़ हैं।
आता-जाता नहीं कोई भी आज कल।

सबके लब पर है हर आन इक आह सी।
मुस्कुराता नहीं कोई भी आज कल।

काम आने को कहते तो हैं सब ‘फ़राज़’।
काम आता नहीं कोई भी आज कल॥