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कृष्ण कह तू …

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’
इन्दौर मध्यप्रदेश)
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कृष्ण जन्माष्टमी स्पर्धा विशेष……….


कृष्ण कह तू या कन्हैया
या मदन गोपाल कह,
हर क्षणों में वह छुपा है
इन पलों से प्यार कर।
कौन कहता है नहीं वह
इस धरा के धाम पर,
धड़कनों में वह बसा है
थोड़ा चित्त को ध्यान धर।
तू कन्हैया पाने की हठ
एक मन में ठान ले,
सांवली सूरत है उसकी
मन को बस तू मांज ले।
बांसुरी के सुर में बंधकर
गीत लिखना आ गया,
देखकर सूरत तुम्हारी
लगता है सब पा लिया।
थी बही यमुना जहां पर
वो किनारा पा गया,
आस बांधी थी जहां पर
लो कन्हैया आ गया।
यूँ लगा सावन की जैसे
रुत वो फिर-से आ गई,
तेरी सूरत देखी जबसे
बस वही मन भा गई।
मानते हैं मन से उसको
जानते हैं तन से हम,
बस बसा लो आँख में तुम
दूर होगा सारा तम।
सीखने की उम्र है हम
सीखना-ना छोड़ दें,
बस करें अब कर्म हम
और प्रीत उनसे जोड़ लें।
जीवन की ये छलके गगरी
अब तो थोड़ा नाम लें,
मन की सारी इच्छाओं को
अब तो पूर्ण विराम दें।
कृष्ण कह तू या कन्हैया…॥

परिचय–कार्तिकेय त्रिपाठी का उपनाम ‘राम’ है। जन्म ११ नवम्बर १९६५ का है। कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) स्थित गांधीनगर में बसे हुए हैं। पेशे से शासकीय विद्यालय में शिक्षक पद पर कार्यरत श्री त्रिपाठी की शिक्षा एम.काम. व बी.एड. है। आपके लेखन की यात्रा १९९० से ‘पत्र सम्पादक के नाम’ से शुरु हुई और अनवरत जारी है। आप कई पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य और फिल्म सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। लगभग २०० पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी पर भी आपकी कविताओं का प्रसारण हो चुका है,तो काव्यसंग्रह-‘ मुस्कानों के रंग’ एवं २ साझा काव्यसंग्रह-काव्य रंग(२०१८) आदि भी प्रकाशित हुए हैं। काव्य गोष्ठियों में सहभागिता करते रहने वाले राम को एक संस्था द्वारा इनकी रचना-‘रामभरोसे और तोप का लाईसेंस’ पर सर्वाधिक लोकप्रिय कविता का पुरस्कार दिया गया है। साथ ही २०१८ में कई रचनाओं पर काव्य संदेश सम्मान सहित अन्य पुरस्कार-सम्मान भी मिले हैं। इनकी लेखनी का उदेश्य सतत साहित्य साधना, मां भारती और मातृभाषा हिंदी की सेवा करना है।

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