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क्या यही माँ ??

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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पूछ रही हूँ मेरी माँ मैं तुझसे,बस तू ये मुझको बता दे,
क्यो फेंका मुझे कूड़ेदान में,अब मुझको तू ये जता दे।

नौ महीने तक रखा पेट में,फिर ऐसी क्या मजबूरी थी,
नहीं चाहिए थी बेटी तुझको,तो पैदा करनी जरूरी थी।

क्या तेरी कोख में पली नहीं,या मैं तेरे खून से बनी नहीं,
क्यों हुई तू इतनी लाचार,क्या मैं हाड़-माँस से सनी नहीं।

क्यों किया तूने गर्भ धारण,जब तू मेरी रक्षा ना कर पायी,
क्यों मिला तुझे माँ बनने का हक,क्यों तूने ये बेटी जायी ?

एहसानमंद हूँ मैं उसकी,जिसने मेरा जीवन बचाया है,
रखा अनाथाश्रम या सुधारगृह में,मेरा जीवन सजाया है।

होती होंगी माँ अच्छी,पर मेरा दिल तो ये नहीं मानता,
फेंक दिया जिसने जन्म देकर,मेरा दिल यही जानता।

फट जाए शरीर ऐसी नारी का,ना कर पाए गर्भ धारण,
पैदा करके जो पाल ना पाए,बता ‘मलिक’ ऐसा कारण।

होते थे पहले पूत कपूत,पर अब माता कुमाता हो गयी,
कलियुग में आकर के देखो,ये माँ कहने का हक खो गयी॥

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।