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गुमान न कर

संजय यादव ‘बाबा’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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क्रोध मत कर,बूढ़ों पर दया कर,या फिर उनके लिए प्रभु से दुआ कर,
गैर जरूरी वजन को बेवजह बढ़ाने की कोशिश मत कर,

दोष,द्वेष व ग्रहना का जहर नहीं,आनंद की फसल उगा,
मुस्कान से बस हर समय,अपने चेहरे व आत्मा को तू सजा।

तुझे इन बुजुर्गों ने चलना-पढ़ना सिखाया,इसलिए तू ये गुमान न कर,
मैं खुद पढ़ी-बढ़ी ये खुद पे गुमान न कर
अगर न होती इनकी उंगली तो क्या थाम पाती तू कलम,
खुद पर ये गुमान न कर।

माँ ने पाला,बाप ने संभाला तो इन बुजुर्गों ने,
उंगली पकड़ के तुम्हें ठोकर खाने से संभाला
आज मैं और तुम तो ठोकर खा के सम्भल गए,
कहते हैं ठाकुर-श्री कृष्ण ठाकुर क्या भूल गए!
उस बुजुर्ग ठाकुर को जिसने तुम्हें सम्भाला।

ये अभिमान न कर तू दया की देवी तो दानव के ये देवता,
हम सब मानव हैं,दानव रूपी गुमान न कर।
छू ले पाँव हे मानव तू मानव के…दानव न बन,
ये बुजुर्ग है,सेवा तो कर मेवा मिलेगा मानव तो बन॥

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