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चलें धर्म की राह सदा

डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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शक्ति, भक्ति और दिखावा…

त्योहारों का है देश हमारा,
होते यहाँ कितने व्रत-अनुष्ठान
यह त्योहार, अलग कुछ हटकर
‘नवरात्रि’ स्त्री शक्ति प्रधान।

मानवता का पाठ पढ़ाता,
धर्म सनातन अपना महान
रावण पर विजयी होने को,
राम ने किया देवी अनुष्ठान।

धन, बल, विद्या बुद्धि देनेवाली,
माँ आदिशक्ति है कल्याणी
पिणाकधारिणी, जगतारिणी
ब्रह्मरूपा, दुर्गा, सिंहवाहिनी।

तेरी शरण में जो कोई आता,
सच्चा सुख वह पाता है
निश्छल भक्ति, मधुर भावना,
हो, भवसागर तर जाता है।

माँ शक्ति स्वरूपा अंतर्यामी,
व्यर्थ ना भक्ति ढोंग रचाना
कुछ दिन कर, पूजा-आरती,
ना कोई कुकर्म अपनाना।

किस काम की भक्ति भावना,
जो नारी का अपमान करे
चलें सब, धर्म की राह सदा,
और एक-दूजे का सम्मान करें।

आदिकाल से स्त्री पूजनीय,
और रही है सर्वशक्तिमान
सरस्वती, दुर्गा और माँ लक्ष्मी,
संस्कृति हमारी मातृप्रधान।

रणचंडी, दुर्गा, विमला, काली,
तेरी महिमा कैसे बखान करूँ।
हम नादान सद्बुद्धि दे माँ,
चरण-कमल में शीश धरूँ॥