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छोड़ चली नश्वर शरीर

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’
जमशेदपुर (झारखण्ड)
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सुरों की अमर लता,
स्वर साधिका आप कोकिला
कंठ में सरस्वती धारे,
मृदुल मधुरिम वाणी की लता।

सप्त स्वर धारिणी,
झंकृत करती बन अमृत प्राण
करुणा,श्रृंगार,वीरता,प्रार्थना,
विरहन की पीड़ा के अश्रु प्यार
बालपन का हो मनुहार।

तेरह वर्ष बालिका,
बन अभिभावक भाई-बहनों की
संघर्षों से जूझ उपर उठी,
कोकिला कंठ ने दिया निखार
था हर गीत इबादत,
नग्न पैर करती थी गान
करुणा की अद्भुत पुकार।

सिनेमा की पार्श्वगायिका,
साम्राज्ञी सुरों की स्वर साधिका
विश्व में पाई विशालता,
आपके मधुरम् स्वर से
सिनेमा जगत बना महान।

दादा साहब फाल्के सम्मान,
भारत रत्न हुई आप
विश्व को गीत स्वर से मदहोश करती,
सुरों की आप अमर लता
रहें ना रहें हम..महका करेंगें,
मेरी आवाज मेरी पहचान
वक्त के सितम,कम हसीन नहीं
लग जा गले फिर ना हो ये हसीं रात,
तीस भाषाओं को स्वर दिया
तीस हजार गानों से उदगार।

तप,त्याग,शालीनता,
मृदुता से भरी अपार
नाजुक,गहरी रूहानी आवाज,
खुशी,शरारत,उदासियाँ
प्रेम की पवित्रता गरिमा,
व्यथा को थपकी मनुहार।

आपकी आवाज आपकी पहचान,
सरस्वती कंठ स्वर में रही
स्वर साधना देवी के चरणों में,
संयम जीवन का आधार
कभी न अस्त होने वाले सूर्य-सी,
सुरों की अमर लता आप।

तेरानवें बसंत में,
माँ शारदा ने हस्त गहा
ले गईं बिटिया को अपने साथ,
भारत का जन-जन रोता
लता दी छोड़ चली नश्वर शरीर,
स्वर की जादूगरी सदा रहेगी,
भारत के हृदय में।

जन-जन में रहती हैं आप,
शत्-शत् नमन आपको
महान लता मंगेशकर जी,
सुरों की अमर लता विशाल।
सिखा गई सबको,
तप संयम साधना है जीवन आधार॥

परिचय- डॉ.आशा गुप्ता का लेखन में उपनाम-श्रेया है। आपकी जन्म तिथि २४ जून तथा जन्म स्थान-अहमदनगर (महाराष्ट्र)है। पितृ स्थान वाशिंदा-वाराणसी(उत्तर प्रदेश) है। वर्तमान में आप जमशेदपुर (झारखण्ड) में निवासरत हैं। डॉ.आशा की शिक्षा-एमबीबीएस,डीजीओ सहित डी फैमिली मेडिसिन एवं एफआईपीएस है। सम्प्रति से आप स्त्री रोग विशेषज्ञ होकर जमशेदपुर के अस्पताल में कार्यरत हैं। चिकित्सकीय पेशे के जरिए सामाजिक सेवा तो लेखनी द्वारा साहित्यिक सेवा में सक्रिय हैं। आप हिंदी,अंग्रेजी व भोजपुरी में भी काव्य,लघुकथा,स्वास्थ्य संबंधी लेख,संस्मरण लिखती हैं तो कथक नृत्य के अलावा संगीत में भी रुचि है। हिंदी,भोजपुरी और अंग्रेजी भाषा की अनुभवी डॉ.गुप्ता का काव्य संकलन-‘आशा की किरण’ और ‘आशा का आकाश’ प्रकाशित हो चुका है। ऐसे ही विभिन्न काव्य संकलनों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में भी लेख-कविताओं का लगातार प्रकाशन हुआ है। आप भारत-अमेरिका में कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्बद्ध होकर पदाधिकारी तथा कई चिकित्सा संस्थानों की व्यावसायिक सदस्य भी हैं। ब्लॉग पर भी अपने भाव व्यक्त करने वाली श्रेया को प्रथम अप्रवासी सम्मलेन(मॉरीशस)में मॉरीशस के प्रधानमंत्री द्वारा सम्मान,भाषाई सौहार्द सम्मान (बर्मिंघम),साहित्य गौरव व हिंदी गौरव सम्मान(न्यूयार्क) सहित विद्योत्मा सम्मान(अ.भा. कवियित्री सम्मेलन)तथा ‘कविरत्न’ उपाधि (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ) प्रमुख रुप से प्राप्त हैं। मॉरीशस ब्रॉड कॉरपोरेशन द्वारा आपकी रचना का प्रसारण किया गया है। विभिन्न मंचों पर काव्य पाठ में भी आप सक्रिय हैं। लेखन के उद्देश्य पर आपका मानना है कि-मातृभाषा हिंदी हृदय में वास करती है,इसलिए लोगों से जुड़ने-समझने के लिए हिंदी उत्तम माध्यम है। बालपन से ही प्रसिद्ध कवि-कवियित्रियों- साहित्यकारों को देखने-सुनने का सौभाग्य मिला तो समझा कि शब्दों में बहुत ही शक्ति होती है। अपनी भावनाओं व सोच को शब्दों में पिरोकर आत्मिक सुख तो पाना है ही,पर हमारी मातृभाषा व संस्कृति से विदेशी भी आकर्षित होते हैं,इसलिए मातृभाषा की गरिमा देश-विदेश में सुगंध फैलाए,यह कामना भी है

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