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जीवन प्रबंधन में समय नियोजन का ही महत्व

राधा गोयल
नई दिल्ली
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जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए समय प्रबंधन का बहुत महत्व है। जो इसका पालन नहीं करते या नहीं समझते, वे खुद तो परेशान होते ही हैं, दूसरों को भी करते हैं। उनका कोई काम समय पर नहीं हो पाता। चाहे कोई नौकरीपेशा हो, गृहिणी या कार्यालय व दुकान पर काम पर जाने वाले पुरुष, सभी के लिए समय प्रबंधन मायने रखता है।

उदाहरण स्वरूप यदि कामकाजी महिला या गृहिणी समय प्रबंधन के हिसाब से काम नहीं करेगी तो कोई काम समय से नहीं होगा।
शाला जाने वाले बच्चे समय पर नहीं पहुंचेंगे तो रोज ही उनकी बस छूट जाएगी। पति समय से कार्यालय नहीं जा पाएंगे और घर में अनावश्यक तनाव का माहौल बनेगा।
कुछ लोग हर समय ‘समय’ के अभाव का रोना रोते रहते हैं और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर भागते हैं। समय प्रबंधन सीखना है तो प्रकृति से सीखो। सूर्य सुबह उगता है और शाम को अस्त होता है। चन्द्रमा भी रोज रात को ही निकलता है और भोर होते ही अस्त हो जाता है। सभी के लिए दिन में चौबीस घण्टे का ही समय होता है। यह हम पर निर्भर करता है कि, हम उसका सदुपयोग-प्रबंधन कैसे करते हैं। महान लोगों की जीवनी पढ़ें तो पता लगेगा कि वे समय प्रबंधन के कारण ही महान बने। यदि आप मिनटों का ध्यान रखेंगे तो घण्टे स्वयं अपना ध्यान रख लेंगे। हम कितने घण्टे सोए, कितने घण्टे काम किया, कितने घण्टे बेकार की बातचीत में बिताए-यह लिखें तो पता लगेगा कि क्यों समय पर काम नहीं कर पाए।
बेहतर है कि, एक रफ डायरी रसोई में व एक शयनकक्ष में अपने सिरहाने रखी जाए। बाजार से सामान लाना है तो उसमें लिखते रहें, ताकि जब बाजार जाएँ तो एक बार में ही काफी काम हो जाए। घर के भी बहुत से काम ऐसे होते हैं, जो लिखे न जाएँ तो नहीं हो पाते। उन्हें लिख लें तो एक-एक करके सभी काम पूरे हो जाते हैं।
उदाहरण स्वरूप-आज कुछ कपड़ों की मरम्मत खुद करनी है या बाजार से करवानी है। वो कपड़े अलग एक लिफाफे में रखे हों तो काम हो जाता है। कल फलां मेहमान को आना है। क्या बनाना है, यह पहले से सुनिश्चित करना होगा। जैसे कल विजयादशमी है। आज ही सोचना पड़ेगा कि बहन-बेटी को आना है तो क्या बनाना है। तली हुई अरबी बनानी हैं तो पहले दिन उबालकर तली जा सकती हैं। कल बनाने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
पता है मैंने यह बात क्यों कही ? आज मैंने २ किलो अरबी उबालकर तलीं। इसलिए तलीं कि लगातार काम नहीं होता। दही भल्ले बनाने हैं तो पहले दिन बनाकर रखने होंगे। दही भी जमानी होगी। कौन-सी मिठाई किससे मंगानी है, यह निर्णय पहले दिन करना होगा।
केवल घर में ही क्यों, मैं तो जब कार्यालय जाती थी, तब भी अपने कामों की सूची रसोई में काम करते-करते बनाती रहती थी। बाद में उन पर प्राथमिकता के हिसाब से १, २, ३, ४ करके क्रम डाल देती थी। उसकी वजह से कभी कोई काम विलम्ब से नहीं हुआ।

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