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ज्ञान दीप जला गए

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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परम पूज्य महात्मा गांधी, जब से वसुन्धरा पर आ गए,
भारतवर्ष के नर-नारी के, पग-पग ज्ञान दीप जला गए।

पढ़-लिख बड़े ज्ञानी, बैरिस्टर थे हमारे पूज्य बापू जी,
स्वीकार करिए आप, नमन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी।

पूज्य बापू महात्मा गांधी, ज्ञान की ज्योत जला गए,
भारत देश आजाद करके, खुशियों का खजाना दे गए।

खुद को त्यागकर, भारतीयों के मन में प्रेम जगाया,
बापू जी का जन्म दिवस, तो सूर्य संग चंद्रमा भी हर्षाया।

खुशी से नाच रहा है, वृन्दावन में कृष्ण का प्यारा मोर,
महात्मा जी का जन्म दिवस है, भारत में हो रहा शोर।

बापू जी देश-विदेश में भी रहते, सबके हाथ-साथ में,
कभी भूल नहीं पाएंगे क्योंकि, बापू है नोट की छाप में।

गांधी जी हाथ में लिए भी नहीं, खड़ग-नहीं ढाल।
मारी थी कलम की मार, फिरंगी को किया बेहाल।

आज चारों ओर वसुन्धरा भी हर्षित हो रही,
बापू की जयकार शंख ध्वनि से निकाल रही।

महात्मा-बापू के शुभ शुभ जन्म दिवस पर,
‘देवन्ती’ बापू को सादर चरण वन्दना रही कर॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |