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तेरा जाना

सारिका त्रिपाठी
लखनऊ(उत्तरप्रदेश)
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था यकीं तुमको कि
हम तुमको भूल जाएँगे,
हमको ये उम्मीद थी कि
हम तुमको याद आएँगे…।

सिलसिला कुछ यूँ हुआ
कि बसर ज़िंदगी होती रही,
जो फासला है दरमियाँ वो…
कभी हम तय नहीं कर पाएँगे।

गर सामना कभी हो गया तो
सितम का सबब हम पूछेंगे,
कह देगें सब आप-बीती
उनको हाले-दिल हम बताएंगे।

रोके से मेरे अगर ना रुके
आँखों से आँसू की लड़ियाँ,
दिल की लगी का राज़ आखिर
ज़माने से कैसे हम छुपाएंगे।

रख लिया है सीने पर पत्थर
समझा लिया है इस दिल को,
ज़िंदगी तेरे साथ ना सही
तेरी यादों के संग हम बिताएँगे।

ता-उम्र रस्ता देखेंगे हम
राहों में प्यार के फूल बिछाएंगे,
तुम हमको याद करो न करो
हम तुमको भूल ना पाएँगे॥

परिचय-सारिका त्रिपाठी का निवास उत्तर प्रदेश राज्य के नवाबी शहर लखनऊ में है। यही स्थाई निवास है। इनकी शिक्षा रसायन शास्त्र में स्नातक है। जन्मतिथि १९ नवम्बर और जन्म स्थान-धनबाद है। आपका कार्यक्षेत्र- रेडियो जॉकी का है। यह पटकथा लिखती हैं तो रेडियो जॉकी का दायित्व भी निभा रही हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत आप झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाती हैं। आपके लेखों का प्रकाशन अखबार में हुआ है। लेखनी का उद्देश्य- हिन्दी भाषा अच्छी लगना और भावनाओं को शब्दों का रूप देना अच्छा लगता है। कलम से सामाजिक बदलाव लाना भी आपकी कोशिश है। भाषा ज्ञान में हिन्दी,अंग्रेजी, बंगला और भोजपुरी है। सारिका जी की रुचि-संगीत एवं रचनाएँ लिखना है।