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दिनकर

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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दिनकर दिनकर से हुए,हिन्दी हिन्द प्रकाश।
तेज सूर जैसा रहा,तुलसी सा आभास॥

जन्म सिमरिया में लिये,सबसे बड़े प्रदेश।
सूरज सम फैला किरण,छाए भारत देश॥

भूषण सा साहित्य ध्रुव,प्रेमचंद्र सा धीर।
आजादी के हित लड़े,दिनकर कलम कबीर॥

भारत के गौरव बने,हिन्दी के सरताज।
बने हिन्द के राष्ट्रकवि,हम कवि करते नाज॥

आजादी के बाद भी,जन हित की आवाज।
प्रतिनिधि संसद के बने,लोकतंत्र हित नाज॥

‘रसवंती’ के रचियता, ‘नये सुभाषित’ लेख।
‘कुरूक्षेत्र’ से ‘वेणुवन’,’कवि श्री’ ‘दिल्ली’ देख॥

‘रश्मिलोक’ ‘हे राम’ से,फिर ‘सूरज का ब्याह’।
‘बापू’ ‘उजली आग’ में,दिनकर की परवाह॥

‘लोक देव नेहरु’ लिखे,फिर ‘रेती के फूल’।
‘धूप छाँह’ अरु ‘उर्वशी’,’वट पीपल’ तरुमूल॥

‘रश्मि रथी’ रचना करे,वे ‘दिनकर के गीत’।
‘चक्रवाल’ ‘साहित्य मुखि’,सच्चे हिन्दी मीत॥

रची ‘काव्य की भूमिका’,’नीलकुसुम’ ‘हे राम’।
लिख ‘भारतीय एकता’,आजादी के नाम॥

‘ज्ञान पीठ’ तुमको मिला, ‘पद्म विभूषण’ मान।
शर्मा बाबू लाल मन, ‘दिनकर’ का सम्मान॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl