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नशे की गिरफ्त में युवा भारत, बड़ा खतरा

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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आज का युवा भारत बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में फँस चुका है। यह एक अत्यंत गंभीर और विकराल समस्या बन गई है। ड्रग्स और शराब जैसी घातक लतों के कारण युवाओं का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है। उनके सामने प्रश्न खड़ा हो गया है कि वे क्या करें और किस दिशा में जाएँ।
  नशे की शुरुआत अक्सर बहुत छोटी वजहों से होती है। शुरू में शौक से, दोस्तों की देखा-देखी, या मित्रों के दबाव में युवा नशा करते हैं। कुछ लोग इसे आधुनिकता और शान की निशानी समझते हैं। अलग और बड़ा दिखने की होड़ में वे शराब एवं सिगरेट को अपना लेते हैं। आज के समय में शराब पीना कई लोगों के लिए इज्जत का सवाल बन गया है। धीरे-धीरे यह शौक लत में बदल जाता है। फिर नशे के बिना रहा नहीं जाता। बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखा, चाय, कॉफी से शुरू होकर यह लत खतरनाक ड्रग्स तक पहुँच जाती है। नशा न मिलने पर शरीर में दर्द और बेचैनी होने लगती है।
  कई युवा पारिवारिक तनाव, अकेलेपन, पढ़ाई या करियर के दबाव के कारण भी नशे का सहारा लेते हैं। वे सोचते हैं कि नशे से मन का बोझ हल्का हो जाएगा, लेकिन सच यह है कि नशा कोई समाधान नहीं है। यह एक समस्या से बचने के लिए दूसरी और बड़ी समस्या को जन्म दे देता है। नशे के कारण युवाओं का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। वे सही और गलत में फर्क करना भूल जाते हैं। उनके पीछे समस्याओं का जाल फैलता चला जाता है।
    वर्तमान समय में सोशल मीडिया एवं इंटरनेट ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। यहाँ नशे से जुड़ी गलत जानकारियाँ बहुत आसानी से मिल जाती हैं। कई फिल्मों और वेब श्रृंखला में नशे को चकाचौन्ध के साथ दिखाया जाता है। इसे देखकर युवा आकर्षित होते हैं, साथ ही कानूनी और गैर-कानूनी नशीले पदार्थों की उपलब्धता भी बहुत आसान हो गई है। हर देश में ड्रग्स चोरी-छिपे बिक रहे हैं।
   नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और देश के भविष्य को नष्ट कर देता है। एक स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण के लिए युवाओं का नशामुक्त होना बहुत जरूरी है। इसके लिए माता-पिता को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए। विद्यालय और महाविद्यालय में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। सरकार को नशे के कारोबार पर सख्त रोक लगानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात, युवाओं को खुद यह समझना होगा कि क्षणिक सुख के लिए वे अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
  आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें, कि हम नशे को ना कहेंगे और अपने साथियों को भी इस दलदल से बाहर निकालने में मदद करेंगे। तभी हम एक मजबूत और नशामुक्त भारत का निर्माण कर पाएँगे।