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प्लास्टिक मुक्त भारत सपना या हकीकत!

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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प्लास्टिक मुक्त भारत सपना या हकीकत ?
आज जन-जन की समस्या है प्लास्टिक का उपयोग,
आज भारत में चारों ओर बस प्लास्टिक का ही समाज है।

हर जगह इसका उपयोग होता, फिर तुरंत फेंक देते,
प्रत्येक मनुष्य इसको अपनाता, मनमाने ढंग से फेंक देता
प्लास्टिक की थैलियाँ हर जगह बिखरी पड़ी मिलेंगी,
इसका पानी पीने से नदी-नाले, तरह-तरह की बीमारी फैलेंगी।

प्लास्टिक गलता नहीं, हर हाल में गंदगी ही बढ़ेगी,
साथ में बेजुबान जानवर इसे भोजन समझ खा लेंगे
जल में रहने वाले जीव मरते, या प्लास्टिक खा जाते,
ये सब मौत को सीधा निमंत्रण दे जाते।

रोड हो या नदी, हर जगह प्लास्टिक का कचरा मिलेगा,
जानवर खा-खा कर मृत्यु की ओर बढ़ते जाएंगे
सुविधा के कारण हम सब इसकी, लाचार हो गए,
अब प्लास्टिक के विकल्प पर ध्यान देना चाहिए।

अब कपड़े के थैले या जूट के थैले का प्रयोग करें,
घर से निकलें तो थैला लेकर ही चलें
प्लास्टिक के दुष्परिणाम का जन-जन में प्रचार करें,
स्कूल-कॉलेज में भी सभी कक्षाओं में इसका प्रचार करें।

इससे सभी के दिमाग में ये बात आ जाए,
“प्लास्टिक का उपयोग अब हमें नहीं करना है”
प्रकृति भी इसके कारण बिगड़ रही,
अब हम सबको ये संकल्प लेना ही होगा।

प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगे, नहीं करेंगे,
कागज के थैले, जूट के थैले, कपड़े के थैले घर से ही लेकर चलेंगे
जब सब यही करेंगे, तो भारत स्वच्छ और सुंदर लगेगा,
और तभी प्लास्टिक मुक्त भारत होगा।

हर आदमी को ईमानदार बनना होगा,
यह संकल्प सबको लेना होगा।
तभी अपना सपना साकार होगा,
भारत मुक्त प्लास्टिक का सपना साकार होगा॥