संजय वर्मा ‘दृष्टि’
मनावर (मध्यप्रदेश)
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आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)…
आजादी और आज हम के अंतराल में हम जिनकी वजह से सुखी हैं, वे हैं ‘हमारे’ बलिदानी, जो देश के लिए न्योछावर हुए। देश के अलग-अलग प्रान्तों में जन्मे वीरों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई थी।कई वीरों के नाम हैं, उनमें एक जानकारी के मुताबिक ऐसे नाम भी हैं, जो बहुत कम पढ़ने में आए हैं।बहुत से नामों मे से जो मालूम है, वो इस प्रकार से है- मालवा-निमाड़ क्षेत्र के वीरों की अमर गाथा जिन्होंने अग्रेजों से मुकाबला कर स्वाधीनता दिलाई थी। एक जानकारी के मुताबिक उन शहीदों में अमझेरा के राणा बख्तावर सिंह, इंदौर के भगीरथ सिलावट और सआदत खाँ, बड़वानी रियासत के पंचमोहली गांव के भीमा नायक जी और उनके साथी मोवसिया जी, रेवलिया जी नायक एवं बड़वानी के ही खाज्या नायक जी, जो सेंधवा घाट के नायक रहे। बड़वानी के सीताराम कंवर और रघुनाथसिंह क्रांतिकारियों में धार की रानी जीजाबाई, रानी कभी भीमराव भोंसलें तथा धार राज्य के दिवान रामचंद्र बापू, गुलाबराय कामदार, सलकूराम पटवारी भोपावर, मोहनलाल कामदार टांडा, कुंवर भावै सिंह मुसाहब, चिमनलाल वकील और मालवा-निमाड़ के अनेक क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और उन्हें देश से बाहर निकालने में अपनी भूमिका निभाई थी। इनके अलावा मालवा निमाड़ के राघोगढ़, महिदपुर, ग्वालियर आदि क्षेत्रों के क्रांतिकारी जुड़े। क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े शहीदों और रण -बाँकुरों के बलिदान का स्मरण करना आवश्यक भी है और हमारा कर्तव्य भी है। पुरुषों में देशभक्त, साहसी, वीर मातृभूमि के लिए शहीद हुए, उन्हें नमन। वहीं महिलाओं में भारत की महान वीरांगनाएँ-वीरांगना वीरमती, महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी अहिल्याबाई, रानी दुर्गावती, राजमाता जीजाबाई, महारानी कर्मवती, रानी चेन्नमा, रानी सारंधा, नारी रत्न येसुबाई, वीरांगना वेलु नाचियार, वीरांगना भीमा बाई, बेगम हजरत महल, क्रांतिकारिणी कामा, रानी गिंडालो, पार्वती देवी, महाराणा प्रताप की जननी, दुर्ग रक्षिका राजकुमारी, स्वतंत्रता सेनानी शहीद प्रीति लता, कल्पना दत्ता, उदा देवी, सुमिति चौधरी, शांति घोष, बीना दास, दुर्गा भाभी व लक्ष्मी सहगल आदि वीरांगनाओं ने देश का मस्तक कीर्ति, गौरव और यश से देशभक्ति निभाकर वीरता से दुश्मनों को पराजित किया। इनकी पुनीत प्रेरणादायी भावनाओं और गुणों को हम सब याद करते हुए नमन करते हैं।
स्वाधीनता के लिए शहीदों का श्रद्धा से स्मरण कर मन में देशभक्ति से युक्त संस्कारों की ऊर्जा भरकर इतिहास पर गर्व करें, साथ ही खुद पर गर्व करें कि हमने भारत की भूमि पर जन्म लिया है, जहाँ- माटी का महत्व व देशभक्ति क्या होती है; का पाठ पढ़ाया जाता है। देश के अमर शहीदों और रणबाँकुरों को नमन, जिनके बलिदान के सहारे अंग्रेजों की बेड़ियों से आजाद होकर हम स्वतंत्र होकर खुली हवा में साँस ले पा रहे हैं।
परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्मे श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर जिला-धार (म.प्र.) है। भाषा ज्ञान हिंदी और अंग्रेजी का रखते हैं। आपकी शिक्षा हायर सेकंडरी और आयटीआय है। कार्यक्षेत्र-नौकरी ( मानचित्रकार के पद पर सरकारी सेवा) है। सामाजिक गतिविधि के तहत समाज की गतिविधियों में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत, दोहा, हायकु, लघुकथा, कहानी, उपन्यास, पिरामिड, कविता, अतुकांत, लेख, पत्र लेखन आदि है। काव्य संग्रह-दरवाजे पर दस्तक, साँझा उपन्यास-खट्टे-मीठे रिश्ते (कनाडा), साझा कहानी संग्रह-सुनो, तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो और लगभग २०० साँझा काव्य संग्रह में आपकी रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर ३८ साल से रचनाएँ छप रहीं हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में देश-प्रदेश-विदेश (कनाडा) की विभिन्न संस्थाओं से करीब ५० सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले संजय वर्मा की विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी के संग साहित्य को बढ़ावा देना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,तो प्रेरणा पुंज-कबीर दास हैं। विशेषज्ञता-पत्र लेखन में है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-देश में हिंदी को पूर्ण बढ़ावा मिले, बेरोजगारी की समस्या दूर हो, महंगाई भी कम हो, महिलाओं पर बलात्कार, उत्पीड़न, शोषण आदि पर अंकुश लगे और महिलाओं का सम्मान हो।