कुल पृष्ठ दर्शन : 3

बस चाय मिल जाए…

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
************************************

व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…

हर कोई इसका है दिवाना,
मेल-मिलाप का ‘सीधा’-सरल खजाना
इसके लिए कोई नहीं करता मना,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

एक ‘प्याली’ इसकी, पीते ही सुकून आ जाए,
घर हो, बाजार या आफिस-दुकान, हर जगह मिल जाए
चाय व्यवहारिक जीवन में, आपसी तालमेल है बढ़ाए,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

चाय मानों इस युग का ‘अमृत’ बन गई,
जिसे पीना चाहता है हर कोई,
जाति-वर्ण, अमीरी-गरीबी सब भूल कर एकसाथ पीते इसे,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…।

सुबह उठते इसे ना पीएं, तो सब कुछ अधूरा लगता है,
दोपहर में नहीं मिले, तो सिर चकराने लगता है।
शाम को घर पर ‘परिजनों’ के साथ इसे पीते ही मन प्रसन्न हो जाता है,
बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…॥