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बाहुबली

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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शक्तिमान और ताकतवर,
बाहुबली कहलाता है
अपनी बाजुओं की ताकत से,
वह सबको घबराता है
जिसकी भुजाओं में ताकत हो,
वह बाहुबली बन जाता है
शक्ति और आतंक के बल पर,
दहशत फैलाता है।

यह ताक़त और पैसे की,
युगलबंदी है
इसमें धन और संपत्ति की,
रहती जुगलबंदी है।

यह समाज में एक बहुत बड़ी,
विकट समस्या है
सुरक्षित जीवन में एक,
कठिन-सी तपस्या है।

यह मानवीय संवेदना का,
अन्त कर देती है
सुकून और खुशियाँ सबसे,
छीन लेती है।

यह सामाजिक समरसता पर,
बहुत बड़ा अवरोध है
समय-समय पर इस उपक्रम का,
किया जाना विरोध है।

इतिहास में बाहुबली का,
पौराणिक कोश सुरक्षित है
यह आज़ की दुनिया की,
बहुत बड़ी जरूरत है।

यह जीवन में एक सात्विक विचार,
उत्पन्न करता है
सम्पूर्ण सद्भाव और संस्कार को,
निर्धारित करता है।

बाहुबली हाथों की ताक़त है,
सबको साथ लेकर चलने की
एक खुबसूरत कसरत है,
बाहुबली हाथों से पकड़
मजबूत बनाता है,
खुशियाँ बिखेरने में
सबसे आगे आता है।

धन-बल और बाहुबल,
बाहुबली का श्रंगार है
सबसे श्रेष्ठ बनने का यह,
एक उत्कृष्ट संस्कार है।

बल और ताकत का यह,
सफल पर्याय है
समस्त संसार में सबसे आगे रहने का,
एक खूबसूरत उपाय है।

अपने हाथों की ताक़त,
बाहुबली का खुबसूरत रंग है
दुनिया में खलबली मचाने का,
सबसे मजबूत ढंग है।

इतिहास में यह दैविक स्वरूप है,
सबमें दिखता इसका अदम्य रूप है
यह पौराणिक कथाओं को,
पुष्ट करने का सबसे बड़ा संस्कार है।
ज़िन्दगी में इस उपाधि से मिलता है सम्मान,
लगता है, मिल गया उपहार है॥

परिचय–पटना (बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता, लेख, लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम., एम.ए.(अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी, इतिहास, लोक प्रशासन व ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी, एलएलएम, एमबीए, सीएआईआईबी व पीएच.-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन) पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित कई लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिसमें-क्षितिज, गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा) आदि हैं। अमलतास, शेफालिका, गुलमोहर, चंद्रमलिका, नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति, चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा, लेखन क्षेत्र में प्रथम, पांचवां व आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के कई अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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