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बूँद-बूँद में गुम-सा…

सुनीता रावत 
अजमेर(राजस्थान)

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बूँद-बूँद में गुम-सा है,
ये सावन भी तो तुम-सा है
बूँद-बूँद में गुम-सा है,
ये सावन भी तो तुम-सा हैl
एक अजनबी एहसास है,
कुछ है नया,कुछ ख़ास है
कुसूर ये सारा मौसम का है,
बूँद-बूँद में गुम-सा है
ये सावन भी तो तुम-सा हैll
चलने दो मनमर्ज़ियाँ,
होने दो गुस्ताखियाँ
फिर कहाँ ये फ़ुरसतें ?
फिर कहाँ नज़दीकियां ?
कह दो तुम भी कहीं लापता तो नहीं,
दिल तुम्हारा भी कुछ चाहता तो नहीं
बूँद-बूँद में गुम-सा हैl
ये सावन भी तो तुम-सा हैll
एक अजनबी एहसास है,
कुछ है नया,कुछ ख़ास है
कुसूर ये सारा मौसम का है,
बूँद-बूँद में गुम-सा हैl
ये सावन भी तो तुम-सा हैll
सिर्फ़ एक मेरे सिवा,
और कुछ ना देख तू
ख्वाहिशों के शहर में
एक मैं हूँ,एक तू,
तुझको आना है तो
बन के तू साँस आ,
ना रहे दूरियाँ
इस कदर पास आ,
बूँद-बूँद में गुम-सा हैl
ये सावन भी तो तुम-सा हैl
बस ये इजाज़त दे मुझे,
जी भर के मैं पी लूँ तुझे,
मैं प्यास हूँ,और तू
शबनम-सा है,
बूँद-बूँद में (बूँद-बूँद में) गुम-सा हैl
ये सावन भी तो (ये सावन भी तो) तुम-सा है….ll

परिचय:सुनीता रावत का जन्म ६ जुलाई १९८६ को ब्यावर(अजमेर) में हुआ है। इनका स्थाई निवास अजमेर(राजस्थान) में ही है। आपकी शिक्षा स्नातकोत्तर (समाज शास्र,इतिहास,राजनीति विज्ञान) और बी.एड. है। सुनीता जी का कार्यक्षेत्र -निजी शिक्षण है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक हित और हिन्दी को प्रचारित करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-गुरुजी,माता-पिता और परम पिता परमेश्वर का आशीर्वाद है। रूचि-अध्यापन कार्य व लेखन में है