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मेरा भीम महान

बुद्धिप्रकाश महावर मन

मलारना (राजस्थान)

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जगत में छाया रे,मेरा भीम महान,
हँसते-हँसते कुर्बान हुए हैं,ये भारत की शान।

मान दिया,सम्मान इसी ने,जीने की राह दिखाई,
तोड़ दिए बन्धन वो पुराने शिक्षा की अलख जगाई।
पिछड़ों का उद्धार किया है,
भारत को संविधान दिया है।
तू जग की पहचान,
मेरा भीम महान।

आन-बान और शान हमारी,तू ही एक सहारा,
डूब रही जब कश्ती हमारी,तू ही था वो किनारा।
पार लगाई कश्ती हमारी,
जिसको मानी दुनिया सारी।
है तुझ पर अभिमान,
मेरा भीम महान।

तू अवतारी मानवता का,दलितों का मसीहा है,
कष्ट सहे हैं कितने तूने,हमें अधिकार दिया है।
करते हैं हम तेरा वंदन,
विश्व रत्न भीमा के नंदन।
“मन” करता गुण-गान।
मेरा भीम महान,
जगत में छाया रे, मेरा भीम महान॥

परिचय-बुद्धिप्रकाश महावर की जन्म तिथि ३ जुलाई १९७६ है। आपका वर्तमान निवास जिला दौसा(राजस्थान) के ग्राम मलारना में है। लेखन में साहित्यिक उपनाम-मन लिखते हैं।हालांकि, एक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ने आपको `तोषमणि` साहित्यिक उप नाम से अलंकृत किया है। एम.ए.(हिंदी) तथा बी.एड. शिक्षित होकर आप अध्यापक (दौसा) हैं। सामाज़िक क्षेत्र में-सामाजिक सुधार कार्यों,बेटी बचाओ जैसे काम में सक्रिय हैं। आप लेखन विधा में कविता,कहानी,संस्मरण,लघुकथा,ग़ज़ल, गीत,नज्म तथा बाल गीत आदि लिखते हैं। ‘हौंसलों के पंखों से'(काव्य संग्रह) तथा ‘कनिका'( कहानी संग्रह) किताब आपके नाम से आ चुकी है। सम्मान में श्री महावर को बाल मुकुंद गुप्त साहित्यिक सम्मान -२०१७,राष्ट्रीय कवि चौपाल साहित्यिक सम्मान-२१०७ तथा दौसा जिला गौरव सम्मान-२०१८ मिला हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय जागृति,पीड़ितों का उद्धार, आत्मखुशी और व्यक्तिगत पहचान स्थापित करना है।