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सिर का ताज

डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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माँ है आँगन की रौनक,
पिता हमारे सूत्रधार हैं
जिन पर टिका है घर,
वो स्तम्भ और आधार हैं।

खन-खन खनकती चूड़ी,
माथे पर बिन्दी आफताब है
माँ से जरा पूछो पिता,
माँ के सिर के ताज हैं।

माँ तो है प्यार की मूरत,
पिता घर के पालनहार हैं
सुख हो या दु:ख हो वो,
सबके सच्चे साझेदार हैं।

माँ ममता की सागर है,
पिता शक्ति और सहारा हैं
इनके बिना तो हम सब,
बेबस और बेसहारा हैं।

घर की सुख-शांति को,
अपने सुख चैन खोए हैं
साथ मेरे कोई और ना रोए,
वो खुद छुप-कर रोए हैं।

उनकी उंगली का सहारा,
हमें ऊपर लेकर जाता है
जहां वह खुद ना पहुंचे,
हमें वहां तक पहुंचाता है।

माँ से मिले मन को शांति,
पिता हमारी पहचान हैं।
दोनों का साथ मिले,
ये अपना अरमान है॥

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