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स्मृति

प्रभावती श.शाखापुरे
दांडेली(कर्नाटक)
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काली अंधियारी रात में
मेरा साया हँसा मुझ पर,
हे मन बावरे
काहे खोजे तू उसे
जो तेरे साथ नहींl
माना कि तेरे पास नहीं है,
क्योंकि,वह तो बसी
तेरी स्मृति में।
मूँद ले अपनी पलकों को,
पायेगा उसकी छवि
देखेंगी निहार कर,
अश्क बहेंगे प्रियतम के,
भीगेगा तेरा मन
क्योंकि,वह तो बसी
तेरी स्मृति में।
अनजान सुनसान पथ पर,
हे मन बावरे
भटक न तू इधर-उधर,
न कर उसकी तलाश
जीवन का सुंदर एहसास है,
जो निभायेगा साथ हर पल
क्योंकि,वह तो बसी
तेरी स्मृति मेंll

परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी एवं जन्म स्थान-विजापुर है। वर्तमान तथा स्थाई पता दांडेली, (कर्नाटक)ही है। आपने एम.ए.,बी.एड.,एम.फिल. और पी.एच-डी. की शिक्षा प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा की शिक्षिका का है। इनकी लेखन विधा-तुकांत, अतुकांत,हाईकु,कहानी,वर्ण पिरामिड, लघुकथा,संस्मरण और गीत आदि है। आपकी विशेष उपलब्धि-श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान मिलना है। श्रीमती शाखापुरे की लेखनी का उद्देश्य-कलम की ताकत से समाज में प्रगति लाने की कोशिश,मन की भावनाओं को व्यक्त करना,एवं समस्याओं को बिंबित कर हटाने की कोशिश करना है।