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हमारी पृथ्वी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


पृथ्वी है हमारी सब ग्रहों से न्यारी,
इसमें ही ईश्वर जड़े हैं जीवों की क्यारी
सब ग्रहों में इसका बड़ा मान है,
इस पर हम सबका अभिमान है।

है यह ममतामयी माता-सी महान,
चोट खाकर भी हमें देती खाद्यान्न
सीने को चीर देती हमें रत्नों का दान,
विचारतीं पल-पल वह मानव का उत्थान
है यह ममतामयी माता-सी महान,
है यह ममतामयी माता-सी महान।

पर इंसान कहाँ मान इनका रख पाया है,
कभी स्वार्थवश जंगलों को काटकर हर्षाया
तो कभी मिट्टी-वायु-जल-प्रदूषण फैलाया है,
तो कभी मिट्टी-वायु-जल-प्रदूषण फैलाया है।

मानव कृत्यों से धरा हो चली है बूढ़ी,
रहे ऐसे ही कृत्य अगर हमारे
ममता धरा की ना बचेगी थोड़ी,
भविष्य में होंगी न धरा फिर न्यारी
भविष्य में होंगी न धरा फिर न्यारी।

अमेरिकी नेल्सन ने जब इसे निहारा था,
खतरा भविष्य का देख सबको पुकारा था
निर्णय लिया उपाय में एक न्यारा था,
पृथ्वी दिवस मनाने का किया इशारा था
पृथ्वी दिवस मनाने का किया इशारा था।

चाहे रूस,इटली हो या फिर जापान,
चाहे फ्रांस,अमेरिका हो या हिन्दुस्तान
सर्वस्व मिल मनायेंगे यह पर्व महान,
सर्वस्व मिल मनायेंगे यह पर्व महान।

२२ अप्रैल की करते हैं बात हम,
दुनिया मनाती है इसे साथ हरदम
महत्व है नहीं इसका अन्य पर्वों से कम,
जन-जन को इसमें जोड़ लायेंगे हम
धरा रक्षा हेतु वृक्ष लगायेंगे हम,
पृथ्वी को स्वच्छ सुन्दर बनायेंगे हम।

इस दिन करते सभी एक ही संकल्प,
धरा रक्षा का लेते हैं पुण्य विकल्पl
धरा रक्षा का लेते हैं पुण्य विकल्प,
इस दिन करते सभी एक ही संकल्पll

परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैl जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैl भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैl साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैl सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंl लेखन विधा-कविता एवं लेख हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंl विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।