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`हिन्दी` भाषा में `अंग्रेजी` के उपयोग से बचा जाए

नरेंद्र श्रीवास्तव
गाडरवारा( मध्यप्रदेश)
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हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और जन-जन की भाषा भी। हिन्दी हमारे राष्ट्र में विविध बोली जाने वाली भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह बेहद खुशी और गौरव की बात है कि वर्तमान में हिन्दी में इतना लेखन हो रहा है जो इसके पहले कभी नहीं लिखा गया। इसकी एक वजह यह भी प्रमुख है कि हिन्दी में सम्पर्क के लिये अनेक माध्यम जैसे समाचार-पत्र,दूरदर्शन,मोबाइल हमें सहजता से उपलब्ध हुए हैं। हम अपनी बात कम समय में या यूँ कहें कि तुरंत अपने संबंधितों के समक्ष रखने में सक्षम हुए हैं।
अतः यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि,हिन्दी के प्रचार और प्रसार में सोशल मीडिया से अनेक संभावनाएं जागी हैं और हम हिन्दी को लेकर और आशान्वित हुए हैं,परंतु इसके साथ ही साथ हमें हिन्दी को सजाने और संवारने के लिये भी सदैव सजग रहना है। एक बात विशेष चिंतनीय है कि हमारे कहने और लिखने में हम हिन्दी शब्दों के बदले अंग्रेजी शब्द शामिल करते जा रहे हैं,यह हमारा हिन्दी को लेकर बेहद कमजोर पक्ष है। हमें इसे गंभीरता से लेना होगा,समझना होगा,बचना होगा। हमें अंग्रेजी से कोई परहेज़ नहीं है। हम जब अंग्रेजी में बात करें तो अंग्रेजी में ही करें,लेकिन यदि हम जब हिन्दी में बोल रहे हों या हिन्दी में लिख रहे हों तो उसमें अंग्रेजी शब्द का उपयोग करने से बचें। यह बहुत ही खेद का विषय हैl इसे कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है,न हम,न मीडिया,न जिम्मेदार लोग।
हिन्दी लेखन और बोल-चाल के लिये समृद्ध और सक्षम भाषा है,उसमें अंग्रेजी शब्दों का उपयोग शायद प्रभाव दिखाने के लिये ही किया जाता है,जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जाना चाहिये। यदि इस आदत या शौक को गंभीरता से नहीं लिया गया तो उपयोग किये जा रहे अंग्रेजी शब्द हमारी हिन्दी भाषा में स्थायी जगह तो बना ही लेंगे,मूल हिन्दी शब्द को भुलाने का काम भी करेंगे।
पुनः दोहराना चाह रहा हूँ कि अंग्रेजी भाषा से कोई परहेज नहीं है,न अंग्रेजी के मान-सम्मान में कोई अनादर का भाव। कहना इतना ही है कि जब हिन्दी में बोला या लिखा जा रहा हो तो उसमें अंग्रेजी शब्दों के उपयोग से बचा जाए।
मेरा मानना है कि हिन्दी भाषी सभी बोल-चाल के समय वे अंग्रेजी शब्द के उपयोग किये बिना हिन्दी अच्छे से बोल सकते हैं। वे सक्षम होते हैं । हाँ,लिखने के समय यदि कभी ऐसी स्थिति बनती है कि तत्समय हमें यदि जो हम कहना या लिखना चाह रहे हों और उसका अंग्रेजी शब्द तो याद आ रहा है,किंतु हिन्दी शब्द याद नहीं आ रहा तब मोबाइल से अंग्रेजी से हिन्दी शब्दावली से हिन्दी शब्द लेकर लिखा जा सकता है।
एक बात और है,कुछ अंग्रेजी शब्द हिन्दी भाषा में अप्रत्यक्ष रूप से मान्य कर लिये गये हैं,जैसे रेल,स्टेशन आदि…आदि परंतु इसी को लेकर अन्य अंग्रेजी शब्दों के उपयोग कर लेने की दलील दी जाए तो अनुचित होगा।
इस संबंध में एक विकल्प रेल्वे स्टेशन में बहुत अच्छा देखने में मिलता है। वहाँ स्टेशन या यूँ कहें संबंधित शहर का नाम या अन्य संदेश-निर्देश २ भाषा में लिखे होते हैं-हिन्दी भाषा और अंग्रेजी भाषा मेंl यदि वह क्षेत्र-राज्य अहिन्दी भाषी है तो हिन्दी,अंग्रेजी के अलावा उस क्षेत्र-राज्य की भाषा इस प्रकार ३ भाषा में लिखा मिलता है। अंग्रेजी और हिन्दी भाषा के उपयोग करने का यह बढ़िया और उचित विकल्प है।
अतएव,लिखते समय यदि ऐसा लगे कि अंग्रेजी शब्द का उपयोग बहुत ही जरूरी है,तब हिन्दी शब्द के साथ कोष्टक लगाकर उसमें उस अंग्रेजी शब्द को लिखा जाना चाहिये।
हिन्दीभाषी एवं हिन्दीप्रेमियों के लिये यह बहुत ही निराशाजनक बात है कि,शहर तो शहर बल्कि गाँवों में अनेक दुकानों और प्रतिष्ठानों के नाम लिखे हिन्दी में जा रहे हैं,परंतु शब्द अंग्रेजी के होते हैं। कई बार ऐसा भी हुआ है कि संबंधित दुकानदार को उसकी दुकान के अंग्रेजी में लिखे गये शब्द का अर्थ भी नहीं मालुम होता। वह हिन्दी में सही अर्थ बतायेगा,लेकिन नाम अंग्रेजी का रखा है। ये विरोधाभास है न ?
इसी तरह मीडिया में चाहे दूरदर्शन के समाचार हों,या दैनिक समाचार-पत्र,सभी में हिन्दी वाक्यों में अंग्रेजी शब्द शामिल होते हैंl और तो और अंग्रेजी शब्द के लघु रूप तक उपयोग में लाये जा रहे हैं। हिन्दी फिल्म है,मगर उसका शीर्षक अंग्रेजी में या हिन्दी नाम है तब भी लिखा होगा अंग्रेजी में। इसे हिन्दी भाषा के साथ अन्याय ही कहा जायेगा। हमें इस प्रकार के उपयोग से बचना भी है और बचाना भी है। सीधी-सीधी समझाइश है कि,हिन्दी के साथ हिन्दी और अंग्रेजी के साथ अंग्रेजी। दोनों भाषा को मिलाकर,हिन्दीभाषी होकर भी अपनी दुकान और प्रतिष्ठानों के नाम में अंग्रेजी का उपयोग करें,अनुचित भी है और हिन्दी के साथ अन्याय भी।